नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बीते कुछ हफ्तों से लगातार रिकॉर्ड तोड़ बढ़त दर्ज करने के बाद सोने की कीमतों में आज मामूली गिरावट देखी गई है। इंडियन बुलियन एसोसिएशन (IBA) के मुताबिक, आज गुरुवार को 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम 1,09,420 रुपये पर कारोबार कर रहा है, जो कि बुधवार के भाव 1,09,440 रुपये से 20 रुपये कम है।
हाल ही में सोना 1,08,000 रुपये का स्तर पार करते हुए ऑल-टाइम हाई 1,09,440 रुपये तक पहुंच गया था। इसकी वजह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिका में फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती को माना जा रहा है। निवेशकों ने जोखिम भरे बाजार की तुलना में सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प मानते हुए भारी खरीदारी की है।
चांदी की कीमत में उछाल
इंडियन बुलियन एसोसिएशन (IBA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आज चांदी की कीमत में तेजी देखी गई है। आज चांदी 1,25,000 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है, जबकि बुधवार को इसका भाव 1,24,250 रुपये था। यानी एक दिन में 750 रुपये प्रति किलो की बढ़त दर्ज की गई है। जहां 24 कैरेट सोना मुख्यतः निवेश के उद्देश्य से खरीदा जाता है, वहीं 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की मांग आमतौर पर ज्वैलरी निर्माण के लिए होती है। इसलिए अलग-अलग कैरेट के सोने की कीमत और उपयोगिता में भी फर्क होता है।
आपके शहर में सोने का ताजा रेट (प्रति 10 ग्राम, 24 कैरेट)
दिल्ली में 1,09,040 रुपये
मुंबई में 1,09,230 रुपये
बेंगलुरु में 1,09,310 रुपये
चेन्नई में 1,09,540 रुपये
कोलकाता में 1,09,080 रुपये
सोने-चांदी की कीमतें हर दिन क्यों बदलती हैं?
हर दिन सोने और चांदी के दाम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है और इसके पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय वजहें होती हैं। सबसे बड़ा असर डॉलर की मजबूती और भारतीय रुपये की स्थिति पर पड़ता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें अमेरिकी डॉलर में तय होती हैं, इसलिए जब डॉलर मजबूत होता है या रुपया कमजोर पड़ता है, तो भारत में सोना महंगा हो जाता है। वहीं, अगर डॉलर कमजोर होता है तो भारत में इनकी कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। इसके अलावा, भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक देश है और इसलिए इंपोर्ट ड्यूटी, जीएसटी और अन्य स्थानीय टैक्स भी सोने की कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। अगर सरकार टैक्स बढ़ा देती है तो कीमतों में बढ़ोतरी होना तय है।
वैश्विक बाजार की स्थिति भी एक बड़ी भूमिका निभाती है। दुनिया के किसी हिस्से में अगर युद्ध छिड़ जाए, आर्थिक मंदी आ जाए, या फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ जाए, तो निवेशक शेयर बाजार से हटकर सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। इससे मांग बढ़ती है और कीमतें चढ़ने लगती हैं। यही वजह है कि सोने-चांदी की कीमतें केवल धातु की सप्लाई या डिमांड पर नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की चाल पर निर्भर करती हैं।




