नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । Employee Enrollment Scheme 2025 यानी ईपीएफओ के तहत कर्मचारी नामांकन योजना 2025 अब लागू हो चुकी है। यह योजना 1 नवंबर, 2025 से शुरू हो गई है। इस योजना के तहत यदि किसी कर्मचारी के लिए पहले भुगतान या कटौती नहीं हुई है, तो नियोक्ताओं को कर्मचारी के हिस्से का योगदान भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय केवल 100 रुपये का नाममात्र दंडात्मक शुल्क लागू होगा। योजना का उद्देश्य है कि नियोक्ता स्वेच्छा से कर्मचारियों का नामांकन करें और उन्हें ईपीएफओ के तहत शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें। संक्षेप में कहे तो यह योजना नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के लिए सरल और प्रेरक व्यवस्था पेश करती है, ताकि कर्मचारी भविष्य निधि में आसानी से नामांकित हो सकें।
कौन-कौन हैं पात्र?
कर्मचारी नामांकन योजना 2025 के लिए पात्र कर्मचारी वह है, जो 1 जुलाई, 2017 से 31 अक्टूबर, 2025 के बीच किसी संगठन में शामिल हुए हों। साथ ही जो नियोक्ता द्वारा घोषणा की गई तिथि तक जीवित और कार्यरत हैं। इस योजना का लाभ सभी प्रतिष्ठानों उठा सकते हैं, चाहे उनके खिलाफ कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 7A, योजना का अनुच्छेद 26B, या कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के अनुच्छेद 8 के तहत जांच चल रही हो।
नियोक्ता के दायित्व
– केवल अपने हिस्से का पीएफ योगदान देना होगा।
– इसके साथ ₹100 का नाममात्र शुल्क देना होगा।
ध्यान दें कि यदि नियोक्ता योजना का लाभ उठा रहे हैं, तो ईपीएफओ स्वतः कार्रवाई नहीं करेगा, बशर्ते कि घोषणा की तिथि तक कर्मचारी संगठन छोड़ चुके हों।
EPFO ने कई नई सुविधाएं की शुरू
ईपीएफओ ने हाल ही में कई नई सुविधाएं भी शुरू की हैं, जिनमें केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली, आधार और चेहरा प्रमाणीकरण, और संशोधित ईसीआर प्रणाली शामिल हैं। इन सेवाओं का उद्देश्य 70 मिलियन से अधिक ग्राहकों को निर्बाध, प्रौद्योगिकी-संचालित सेवा प्रदान करना है। श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने बताया कि प्रधानमंत्री विकासशील भारत रोजगार योजना (PMVBARY) के कार्यान्वयन में ईपीएफओ की केंद्रीय भूमिका महत्वपूर्ण है, जिसका उद्देश्य 3.5 करोड़ नई नौकरियों को बढ़ावा देना और विभिन्न क्षेत्रों में औपचारिक रोजगार का विस्तार करना है।





