नई दिल्ली, रफ्तार। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के लिए अब 5 दिन बचे हैं। इसके बाद जुर्माने के साथ आईटीआर दाखिल कर सकते हैं। दरअसल, जिनकी आय इनकम टैक्स स्लैब में आती है, उन्हें टैक्स भरना होता है। यह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के अंतर्गत आता है। वैसे, सिक्किम ऐसा राज्य है, जहां सालाना करोड़ रुपए कमाने वाले को भी इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता है। आयकर विभाग भी उनसटैक्स नहीं वसूल सकती है। े
अनुच्छेद 372 के मुताबिक टैक्सेशन के दायरे से सिक्किम बाहर
सिक्किम टैक्स फ्री स्टेट है। इस प्रदेश के लोगों को अपनी कमाई पर एक रुपए भी टैक्स नहीं देना होता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 372 (एफ) के अनुसार इस राज्य को टैक्सेशन के दायरे से बाहर रखा गया है।
सिक्किम वालों को छूट क्यों?
1975 में भारत में सिक्किम का विलय हुआ था। सिक्किम ने शर्त रखी थी कि उसके अपने पुराने कानून और स्पेशल स्टेटस भारत में विलय के बाद भी कायम रहेंगे, जिस सरकार ने मान लिया था। इस प्रदेश के मूल निवासियों को आयकर अधिनियम की धारा, 1961 की धारा 10 (26AAA) के तहत इनकम टैक्स से छूट मिली है। गौरतलब है कि इस प्रदेश को आर्टिकल 371-एफ के तहत विशेष दर्जा मिला है।
नियम जानें
सेक्शन 10 (26AAA) कहता है कि सिक्किम के मूल निवासी की आय टैक्स दायरे से बाहर रहेगी। वो किसी भी तरह की सिक्योरिटी से मिले इंटरेस्ट से आई हो या डिविडेंड से मुनाफा मिला हो। यह बताया गया है कि सिक्किम के भारत में विलय से पहले जो लोग वहां बसे थे, चाहे उनका नाम Sikkim Subjects Regulations, 1961 के रजिस्टर में हो अथवा नहीं, उन्हें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(26AAA) के तहत छूट मिलती है।
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