नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि अगर उनका सिबिल स्कोर 750 या उससे ऊपर है, तो बैंक तुरंत लोन मंजूर कर देगा। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। बैंक सिर्फ आपके सिबिल स्कोर पर भरोसा नहीं करते, बल्कि आपकी पूरी वित्तीय स्थिति का सूक्ष्म परीक्षण करते हैं। आपकी आय, खर्च और कर्ज के आधार पर बैंक तीन महत्वपूर्ण रेश्यो निकालते हैं, जिससे पता चलता है कि आप लोन चुकाने की क्षमता रखते भी हैं या नहीं।आइए समझते हैं कि, ये तीन रेश्यो क्या होते हैं और लोन अप्रूवल में क्यों अहम भूमिका निभाते हैं।
1. Debt-to-Income Ratio (DTI): आय के मुकाबले कर्ज का बोझ
DTI बताता है कि आपकी कुल मासिक आय में से कितना हिस्सा मौजूदा कर्ज की ईएमआई में जा रहा है।
फॉर्मूला: DTI = (कुल मासिक EMI ÷ कुल मासिक इनकम) × 100
बैंक की नजर में 25–35% DTI सुरक्षित माना जाता है।40% से ऊपर DTI बैंक के लिए जोखिम बढ़ाता है।
उदाहरण: यदि आपकी मासिक इनकम ₹1 लाख है और मौजूदा ईएमआई ₹25,000 है, तो DTI = 25%, जो अच्छा माना जाता है।DTI जितना ज्यादा होगा, लोन रिजेक्ट होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
2. EMI-to-Net Monthly Income Ratio (EMI/NMI)
यह रेश्यो बताता है कि टैक्स कटने के बाद मिलने वाली सैलरी में से कितना हिस्सा ईएमआई में जा रहा है।
बैंक की अपेक्षा: EMI/NMI 50–55% से कम होना चाहिए।
इससे ऊपर होने पर बैंक को लगता है कि आपके पास जीवनयापन के खर्च के लिए पर्याप्त राशि नहीं बचेगी।
उदाहरण: अगर आपकी नेट इनकम ₹80,000 है और आपकी कुल EMI ₹48,000 (60%) है, तो बैंक इसे हाई रिस्क मानकर लोन रोक सकता है।
3. Loan-to-Value Ratio (LTV): बैंक कितना जोखिम ले रहा है
यह रेश्यो मुख्यत: होम लोन और कार लोन में देखा जाता है।
LTV बताता है कि संपत्ति की कीमत के मुकाबले बैंक कितना लोन दे रहा है।
उदाहरण: ₹50 लाख के घर पर ₹40 लाख का लोन LTV = 80%
क्या बेहतर:70–80% LTV सुरक्षित माना जाता है।LTV जितना कम होगा, बैंक उतना ही कम जोखिम उठाएगा और आपको कम ब्याज दर मिल सकती है।
सिर्फ सिबिल स्कोर नहीं, ये 3 रेश्यो तय करते हैं आपका लोन भविष्य
सिबिल स्कोर (300–900) आपके पिछले भुगतान व्यवहार का संकेत देता है, लेकिन बैंक यह भी देखता है कि आपकी आय और कर्ज में संतुलन है या नहीं। आपका सिबिल स्कोर 750+ है, तो DTI, EMI/NMI और LTV रेश्यो बैंक के मानक में फिट बैठते हैं तो, लोन तेजी से मंजूर होता है। ब्याज दर कम मिलती है इसलिए, ज्यादा दस्तावेज़ नहीं मांगे जाते।
इन रेश्यो को सुधारने के आसान तरीके
DTI सुधारें
महंगे कर्ज (जैसे क्रेडिट कार्ड) जल्दी चुकाएँ
कर्ज को एक सस्ते लोन में समेकित करें
आय के नए स्रोत जोड़ें
EMI/NMI सुधारें
नए छोटे लोन न लें
BNPL जैसी योजनाओं से बचें
शॉर्ट टर्म लोन की अवधि बढ़ाकर EMI कम करें
LTV सुधारें
संपत्ति खरीदते समय अधिक डाउन पेमेंट करें
बैंक से ब्याज दर पर बातचीत करें
संपत्ति का सही मूल्यांकन सुनिश्चित करें
अंतिम बात: मजबूत वित्तीय स्वास्थ्य ही है आसान लोन की असली चाबी
सिर्फ 750+ सिबिल स्कोर देखकर खुश न होंबैंक आपकी रियल चुकाने की क्षमता तीन रेश्यो से जांचते हैं। यदि आप लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो पहले इन रेश्यो को संतुलित करें। इससे लोन अप्रूवल न केवल आसान होगा, बल्कि आपको ब्याज दर में भी बड़ा फायदा मिलेगा।





