नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। क्या आपने कभी सोचा है कि जो डिलिवरी बॉय आपके दरवाजे तक 10 मिनट में सामान पहुंचाता है, उसे इसके बदले कितना पैसा मिलता है? क्या उन्हें सैलरी मिलती है या सिर्फ प्रति डिलिवरी भुगतान? अब यह सवाल सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संसद तक पहुंच गया है।
संसद में उठी डिलिवरी बॉय की कमाई की बात
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने संसद में गिग इकॉनमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने डिलिवरी बॉय के कम पारिश्रमिक, सोशल सिक्योरिटी और काम के लंबे घंटों को लेकर सवाल खड़े किए। इसके बाद डिलिवरी बॉय की असली कमाई को लेकर चर्चा तेज हो गई। आमतौर पर लोगों का अंदाजा 5 से 20 रुपये तक का होता है। लेकिन असलियत जानने के लिए हमने एक बड़ी डिलिवरी कंपनी के पेमेंट सिस्टम को समझा। प्रयागराज के मऊआइमा हब के इंचार्ज अभिषेक मिश्रा ने बताया कि कंपनी डिलिवरी बॉय को “विश मास्टर” कहकर संबोधित करती है और उनका पेमेंट सिस्टम तय नियमों पर चलता है।
एक दिन में कितनी डिलिवरी और कितनी कमाई?
अभिषेक मिश्रा के मुताबिक एक डिलिवरी बॉय 80 से 90 पैकेट आसानी से पहुंचा सकता है इससे 1100 से 1300 रुपये तक की कमाई हो जाती है अनुभवी डिलिवरी बॉय एक दिन में 100 पैकेट तक डिलिवर कर लेते हैं डिलिवरी का काम आमतौर पर 8 घंटे का होता है। अभिषेक बताते हैं कि यह काम बिना ज्यादा दबाव के किया जाता है। कुछ अनुभवी डिलिवरी बॉय महीने में 30 से 35 हजार रुपये तक कमा रहे हैं, वो भी अपने ही इलाके में काम करते हुए।
क्या हर हफ्ते छुट्टी मिलती है?
डिलिवरी बॉय को कोई फिक्स साप्ताहिक छुट्टी नहीं मिलती। छुट्टी आपसी समझ से ली जाती है, क्योंकि रोजाना कस्टमर को डिलिवरी करनी होती है और रूट मैनेजमेंट एक चुनौती रहता है। डिलिवरी बॉय को पेट्रोल गाड़ी की मेंटेनेंस का खर्च खुद उठाना पड़ता है। कंपनी यह खर्च नहीं देती।
दूरी बढ़ने पर बढ़ता है पेमेंट?
हां, आउटर एरिया में डिलिवरी करने पर ज्यादा पैसे मिलते हैं। 40 पैकेट तक एक डिलिवरी पर 18 रुपये 40 से ज्यादा पैकेट होने पर यह घटकर 13 रुपये प्रति डिलिवरी हो जाता है यह तय करना हब इंचार्ज के अधिकार में होता है।




