नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय रुपये ने मंगलवार को इतिहास का सबसे कमजोर स्तर छू लिया। जहां डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 91 के पार चला गया। सिर्फ 10 कारोबारी सत्रों में रुपये ने 90 से 91 का सफर तय कर लिया है, जिसने करेंसी मार्केट में हड़कंप मचा दिया है। मौजूदा साल में अब तक रुपये में 6.4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। इंटर बैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया 90.87 पर खुला, लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ इसमें लगातार कमजोरी आती गई। सुबह 11:45 बजे रुपये का भाव 91.14 प्रति डॉलर तक फिसल गया। सोमवार को ही रुपया 90.78 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था।
विदेशी निवेशकों की निकासी ने बढ़ाया दबाव
जानकारों के मुताबिक, रुपये में आई इस ऐतिहासिक गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को विदेशी निवेशकों ने 1,468 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे।इसके साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता फिलहाल जल्दी होता नजर नहीं आ रहा है। अमेरिका की ओर से कृषि मुद्दों पर सख्त रुख और भारत के स्पष्ट विरोध के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है। उनका मानना है कि इसी वजह से रुपये के इस महीने 92 प्रति डॉलर तक पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये की कमजोरी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं, जिनमें विदेशी निवेशकों की धन निकासी, निर्यातकों द्वारा डॉलर का भंडारण, तेल कंपनियों और सट्टेबाजों की डॉलर खरीद, कर भुगतान के चलते बाजार में नकदी की कमी, कर्ज बिक्री और व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि व्यापार घाटे में कमी आने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद रुपये को कोई खास सहारा नहीं मिल सका।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई लगातार दूसरे महीने -0.32 फीसदी पर बनी रही, लेकिन इसके बावजूद रुपये की कमजोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। रुपये की गिरावट का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जहां शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 363 अंक से अधिक टूटकर 84,849 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 106 अंक गिरकर 25,920 पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों की निकासी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर को भी छू सकता है। ऐसे में अब बाजार की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप पर टिकी हुई हैं।
भारतीय रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया। साल 2025 में अब तक रुपये में 6.4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिसने करेंसी मार्केट में चिंता बढ़ा दी है। इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया 90.87 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसकी कमजोरी गहराती चली गई। सुबह 11:45 बजे रुपया 91.14 प्रति डॉलर तक फिसल गया, जो अब तक का नया निचला स्तर है। इससे पहले सोमवार को भी रुपया 90.78 प्रति डॉलर पर बंद होकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुका था। रुपये की लगातार गिरावट ने बाजार में हड़कंप मचा दिया है और निवेशकों की नजरें अब भारतीय रिजर्व बैंक के अगले कदम पर टिकी हैं।





