नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । आपने अक्सर चेक बाउंस का नाम तो सुना ही होगा। कई लोग कहते है कि चेक बाउंस होने पर उसका सीधा असर सिबिल स्कोर पर पड़ता है। आपको भी लगता होगा कि चेक बाउंस होना कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन ऐसा नहीं है। बार-बार चेक अगर बाउंस होगा तो आपको इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
एक रिपोर्ट मुताबिक, चेक बाउंस का लगातार पैटर्न अप्रत्यक्ष रूप से आपकी CIBIL रिपोर्ट को प्रभावित कर सकता है। सिबिल स्कोर आपकी लोन पाने की पात्रता को तय करता है। ऐसे में आप का अपना सिबिल स्कोर को मेंटेन करना जरुरी हो जाता है। सिबिल स्कोर के कमजोर होने से बैंक यह मान लेता है कि आप समय पर EMI चुकाने में असमर्थ हो सकते हैं। ऐसे में चेक बाउंस न हो, इस पर गौर करना जरूरी है।
चेक बाउंस से कैसे CIBIL स्कोर होता है प्रभावित
बैंक के साथ संबंध खराब करना
बैंक लगातार चेक बाउंस मामलों को लेकर अलर्ट रहते है। अगर आपका चेक तकनीकी समस्याओं के चलते एक बार अस्वीकृत हो जाता है, तो अफसर इसे एक अलग मामले के रूप में पास कर देते हैं। हालांकि, अगर यह स्थिति लगातार बनी रहती है, तो बैंक इसे वित्तीय लापरवाही के रूप में देखता है। ऐसे में बैंक के साथ आपका रिलेशन खराब होता है।
क्रेडिट सुविधा पर लग सकता है बैन
लगातार चेक बाउंस के साथ, बैंक अधिकारी ओवरड्राफ्ट सुविधाओं को ब्लॉक कर सकते हैं, क्रेडिट लिमिट कम कर सकते हैं, या खाते को फ्रीज कर सकते हैं। ऐसे बैन आपके वित्तीय लेनदेन और प्रबंधन को प्रभावित कर सकते हैं। व्यवसाय मालिकों के लिए, क्रेडिट सुविधाओं पर बैन कैश फ्लो और विक्रेता भुगतान को प्रभावित करते हैं।
कानून का करना पड़ सकता है सामना
अगर चेक बाउंस का मामला अदालत पहुंचता है तो कोर्ट आपके पक्ष में नहीं होगी। आपको एक रिकवरी ऑर्डर हासिल होगा, जिसके विफल होने से आपकी वित्तीय विश्वसनीयता को नुकसान हो सकता है। हालांकि ,कोर्ट का फैसला सीधे आपके CIBIL स्कोर को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन भविष्य में आपके एप्लीकेशन अस्वीकार किए जा सकते हैं।
जोखिम बढ़ाता है
एक बाउंस चेक बैंकों के मन में निगेटिव असर छोड़ता है। ऐसे में बैंक से आपका व्यहार खराब हो सकता है। उन्हें लगता है कि आप एक हाई रिस्क वाले ग्राहक हैं और हो सकता है कि वे आपके लोन एप्लीकेशन को अप्रूव न करें। हालांकि, यह सीधे आपकी क्रेडिट रिपोर्ट या सिबिल रिपोर्ट पर असर नहीं पड़ता है, लेकिन यह लोन स्वीकृति हासिल करने की संभावनाओं को कम कर सकता है।
CIBIL स्कोर क्या है?
CIBIL यानी क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड 3 अंकों की एक संख्या जारी करता है जिसे सिबिल स्कोर कहा जाता है। यह 300 से 900 के बीच होता है और खाताधारक की क्रेडिट और रीपेमेंट क्षमता को दर्शाता है।
वही, क्रेडिट स्कोर आपके वित्तीय इतिहास, EMI रीपेमेंट और क्रेडिट कार्ड बिल क्लीयरेंस द्वारा तय किया जाता है। 750 से ऊपर का स्कोर कम जोखिम को दर्शाता है 750 से नीचे का स्कोर हाई रिस्क को दर्शाता है।





