नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । पिछले दो हफ्तों में सोने की चमक फीकी पड़ गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने की कीमतें अपने पीक से करीब 13 हजार रुपए प्रति दस ग्राम गिर गई हैं, यानी कीमतों में लगभग 10 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए चौंकाने वाला कदम है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या सोने की कीमतें और गिरेंगी, या यह गिरावट के बाद एक बार फिर तेजी के साथ बाउंसबैक करेगी। निवेशकों की नजरें आगामी रुझानों और वैश्विक बाजार की स्थितियों पर टिकी हैं।
जानकारों का कहना है कि सोने की कीमतों के दोनों रास्ते। गिरावट और बाउंसबैक—संभावित हैं। इसका कारण यह है कि मौजूदा समय में सोने को दबाने और उसे समर्थन देने वाले दोनों ही कारक एक साथ प्रभाव डाल रहे हैं।
जहां एक ओर अमेरिकी फेड रिजर्व की संभावित 25 बेसिस प्वाइंट कटौती गोल्ड के लिए सहायक दिख रही है, वहीं अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड डील के तनाव सोने की कीमतों में गिरावट का संकेत दे रहे हैं। हालांकि, बुधवार को देश के वायदा बाजार में शुरुआती कमजोरी के बाद सोने में तेजी देखी गई और कारोबारी सत्र के दौरान कीमतों में एक हजार रुपए से अधिक का इजाफा हुआ। जानकार इस समय निवेशकों को सतर्क रहते हुए अवसरों का फायदा उठाने की सलाह दे रहे हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतें अपने लाइफ टाइम हाई से लगभग 13,000 रुपए गिर गई हैं, जिससे हाल ही में सोने में निवेश करने वाले कई लोगों में चिंता पैदा हो गई है। 1,32,294 रुपए प्रति 10 ग्राम के पीक से कीमत बुधवार को 1,19,351 रुपए तक आ गई, यानी 12,943 रुपए की गिरावट।
इस उतार-चढ़ाव भरे दौर ने निवेशकों में सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह गहरी गिरावट की शुरुआत है या लंबी अवधि के लिए खरीदारी का अवसर। वैश्विक कारकों और ट्रेड अस्थिरता ने भी इस दौरान बाजार को प्रभावित किया है।
कौन से फैक्टर पड़ रहे भारी?
ऑगमोंट में रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी ने ईटी को बताया कि अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन कम होने के संकेतों के चलते सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की अपील कुछ कम हो गई है। इसका असर दिखते हुए सोने की कीमतें 4,000 डॉलर और चांदी 47 डॉलर से नीचे आ गई हैं। अब बाजार के खिलाड़ी इस सप्ताह फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिका और चीन के बीच संभावित व्यापार युद्धविराम की उम्मीदों ने सोने की चमक को कम कर दिया है। टॉप आर्थिक अधिकारियों ने समझौते की शर्तों पर काम किया, जिसका अंतिम फैसला इस सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी समकक्ष शी जिनपिंग करेंगे।
लेकिन निवेशक केवल अमेरिका-चीन ट्रेड फैसले पर ही नजर नहीं रख रहे हैं। फेड का आगामी ब्याज दर निर्णय सोने की कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है। चैनानी के अनुसार, यदि फेड दर में अनुमानित कटौती के साथ नरम रुख अपनाता है, तो सोने की मांग बढ़ सकती है, क्योंकि कम ब्याज दर नॉन-यील्ड वाले असेट्स को फिर से आकर्षक बनाती है।
क्या है जानकारों का अनुमान?
सोने की गिरावट केवल वैश्विक बाजारों तक सीमित नहीं रही; घरेलू वायदा बाजार भी दबाव में है। मंगलवार को एमसीएक्स दिसंबर अनुबंध 1.08% गिरकर 1,19,646 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र में सोना कुछ देर के लिए 1,18,450 रुपए तक गिर गया, फिर आंशिक सुधार दिखा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों ने हाल के निचले स्तरों का परीक्षण किया है, लेकिन कुछ तकनीकी समर्थन अभी भी कायम हैं। सोना 3,870 डॉलर के ‘करो या मरो’ स्तर पर बना हुआ है, जबकि चांदी 46.50 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के समर्थन स्तर पर बनी हुई है।
इस हफ्ते उतार-चढ़ाव की संभावना
विश्लेषकों का अनुमान है कि इस हफ्ते फेड पॉलिसी मीटिंग और अमेरिका-चीन संबंधों से सोने में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। उनका कहना है कि सोना 3,870–4,280 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस और चांदी 45.50–51.50 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में कारोबार कर सकती है।
भारतीय बाजारों में, एक्सपर्ट ने इस सप्ताह सोने के लिए 1,17,000–1,18,000 रुपए के स्तर पर सपोर्ट और 1,20,500–1,21,400 रुपए पर रेसिस्टेंस का अनुमान लगाया है। उनका मानना है कि अगर ये स्तर कायम रहते हैं, तो सोना 1,21,500 रुपए तक लौट सकता है, जबकि चांदी निकट भविष्य में 1,47,000 रुपए के स्तर तक पहुंच सकती है।
इस हफ्ते ये फैक्टर है अहम
एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, फेड मीटिंग और हालिया जियो-पॉलिटिकल संकेतों से पहले सोने की धारणा में तेजी की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन अमेरिका-चीन ट्रेड डील को लेकर नया उत्साह कम होने से सोना 2,500 रुपए की और गिरावट के साथ 1,18,450 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
अब सभी की नजर बुधवार रात आने वाले अमेरिकी फेड के ब्याज दर फैसले पर है, जो सोने के अगले रुझान को दिशा देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, सोना 1,16,500–1,18,000 रुपए पर प्रमुख सपोर्ट के साथ दबाव में है, जबकि 1,21,000–1,22,000 रुपए के आसपास रेसिस्टेंस देखा जा रहा है।
इस समय सतर्क है निवेशक?
विश्लेषक इस समय सतर्क हैं और सोने में आगे गिरावट की संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रहे। वे 1,17,000 रुपए के आसपास मजबूत समर्थन की संभावना भी बता रहे हैं। व्यापक आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी कमजोरी के मिलेजुले प्रभाव के कारण, आने वाले दिनों में व्यापारियों को भारी अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, कुछ लॉन्ग-टर्म निवेशक हालिया गिरावट को सोने में एंट्री प्वाइंट मान सकते हैं, विश्लेषक फेड की भाषा और अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन पर कड़ी नजर रख रहे हैं। तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है।





