नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । अचानक पैसों की जरूरत किसी भी समय आ सकती है, चाहे वह शादी का खर्च हो, मेडिकल इमरजेंसी या फिर कोई घरेलू जरूरत। ऐसे में लोग अक्सर पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं। लेकिन जरा-सी लापरवाही आपकी लोन एप्लिकेशन को बार-बार रिजेक्ट करवा सकती है। इससे न सिर्फ आपकी जरूरतें अधूरी रह जाती हैं, बल्कि आपका क्रेडिट स्कोर भी प्रभावित होता है, जो भविष्य में लोन लेना और मुश्किल बना सकता है। अगर आप कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें, तो लोन अप्रूवल की संभावना बढ़ सकती है। आइए जानते हैं वो 4 अहम बातें जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
1. सबसे पहले जांचें अपना क्रेडिट स्कोर
पर्सनल लोन मंज़ूर होने की राह में सबसे अहम भूमिका क्रेडिट स्कोर निभाता है। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है, तो बैंक या लोन कंपनियों के लिए आप एक भरोसेमंद उधारकर्ता माने जाते हैं। क्रेडिट स्कोर आपकी वित्तीय साख का आईना होता है, जिससे यह तय किया जाता है कि आपको लोन दिया जाए या नहीं। अगर आपका स्कोर 750 से कम है, तो लोन रिजेक्ट होने की संभावना बढ़ जाती है। पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपना क्रेडिट स्कोर जरूर चेक करें। अगर स्कोर कम है, तो पहले उसे सुधारें।
2. स्थायी नौकरी और नियमित इनकम है बेहद जरूरी
पर्सनल लोन की मंज़ूरी के लिए आपकी नौकरी की स्थिरता और नियमित आय का स्रोत सबसे अहम फैक्टर होते हैं। बैंक या वित्तीय संस्थाएं यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि आप लोन की EMI समय पर चुका पाएंगे या नहीं। अगर आप एक फुल-टाइम नौकरीपेशा हैं और किसी कंपनी में लगातार 1–2 साल से काम कर रहे हैं, तो यह आपकी विश्वसनीयता बढ़ाता है। इसके अलावा, आपकी इनकम जितनी ज्यादा और स्थिर होगी, लोन अप्रूवल के चांस उतने ही बेहतर होंगे।
3. उम्र भी बन सकती है लोन अप्रूवल की वजह या रुकावट
पर्सनल लोन देने से पहले बैंक आपकी उम्र पर भी खास ध्यान देती है। आमतौर पर बैंक उन्हीं लोगों को लोन देना पसंद करती हैं, जिनकी उम्र 21 से 60 साल के बीच होती है। इस आयु वर्ग के लोगों को नौकरी और कमाई के बेहतर अवसर मिलते हैं, जिससे लोन चुकाने की संभावना अधिक रहती है। खासकर युवाओं को लोन मिलने के मौके ज्यादा होते हैं, क्योंकि उनके पास लंबा करियर और कमाई की स्थिरता होती है। अगर आपकी उम्र बहुत कम (21 से नीचे) या बहुत ज्यादा (60 से ऊपर) है, तो बैंक लोन देने में हिचक सकती है।
4. EMI बोझ और कंपनी की प्रोफाइल भी करती है फर्क
पर्सनल लोन मंजूरी से पहले बैंक यह जांचता है कि आप पर पहले से कितना वित्तीय बोझ है। अगर आपकी मासिक आय का बड़ा हिस्सा पहले से चल रही EMI में जा रहा है, तो नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। आमतौर पर बैंक यह देखता है कि आपकी कुल EMI, आपकी इनकम की 50% सीमा से ज्यादा न हो। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि आप नए लोन की किस्त समय पर चुका पाएंगे। पुराने लोन की EMI समय पर चुकाएं और अगर संभव हो तो कुछ कर्ज खत्म करके ही नया पर्सनल लोन लें। इससे आपकी लोन एलिजिबिलिटी बेहतर हो जाएगी।
इसके साथ ही, आप किस कंपनी में काम करते हैं, यह भी बैंक के फैसले को प्रभावित करता है। अगर आप किसी स्थिर और प्रतिष्ठित कंपनी (MNC या सरकारी संस्थान) में काम कर रहे हैं, तो बैंक को आप पर ज्यादा भरोसा होता है, क्योंकि इससे आपकी नियमित इनकम की संभावना पक्की मानी जाती है।





