Amul का अनोखा सफर, आजादी से पहले बेहद छोटे लेवल पर शुरुआत, आज दुनिया की 8वीं सबसे बड़ी Dairy Company

Amul Golden Jubilee Celebration : अमूल के दूध, आइसक्रीम, पनीर और दूसरे प्रोडक्टस हम सभी ने कभी-न-कभी जरूर खाया है। अमूल डेयरी को 50 वर्ष पूरे हुए हैं। कंपनी दुनिया की आठवीं सबसे बड़ी डेयरी कंपनी है।
अमूल के उत्पाद।
अमूल के उत्पाद। @Amul_Coop एक्स सोशल मीडिया।

नई दिल्ली, रफ्तार। अमूल। इसके दूध, आइसक्रीम, पनीर और दूसरे प्रोडक्टस हम सभी ने कभी-न-कभी जरूर खाया है। अमूल डेयरी को 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं। आज यह कंपनी दुनिया की आठवीं सबसे बड़ी डेयरी कंपनी है। देश में पहले पायदान पर है। इसके प्रोडक्ट्स बच्चे से लेकर बूढ़ें तक आए दिन खाते हैं। आज अमूल ब्रांड का संचालक गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF) गोल्डन जुबली सेलिब्रेट कर रहा है। इस उपलक्ष्य पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Amul को दुनिया की नंबर-1 डेयरी कंपनी बनाने की गारंटी दी। उन्होंने कहा ऐसा होगा और यह मोदी की गारंटी है।

50 वर्ष पहले हुई थी शुरुआत

Amul के केवल दूध ही नहीं, बल्कि अन्य प्रोडक्‍ट्स की खासी मांग है। इनमें मिल्‍क पाउडर, हेल्‍थ बेवरेज, घी, मक्‍खन, चीज, पिज्‍जा चीज, आइसक्रीम, पनीर, चॉकलेट और पारंपरिक भारतीय मिठाइयां हैं। गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF) के स्वर्ण जयंती समारोह में गुरुवार को पहुंचे पीएम मोदी ने अमूल ब्रांड की खूब तारीफ की। इसे सहकार का सामर्थ्य करार दिया। मोदी ने कहा कि गुजरात के गांवों ने मिलकर 50 वर्ष पहले जो पौधा लगाया था, वह विशाल वटवृक्ष बन गया है। उसकी शाखाएं देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक फैली है।

77 साल पहले ऐसे पड़ी थी नींव

अमूल मिल्क कंपनी की शुरुआत 77 साल पहले 1946 में हुई थी। आनंद मिल्‍क यूनियन लिमिटेड यानी AMUL डेयरी सहकारी संस्था है। यह गुजरात के आणंद में स्थित है। इसकी शुरुआत से पहले तक दुग्‍ध उत्‍पादक अपना दूध बिचौलियों एवं व्‍याप‍ारियों से बेचने को मजबूर थे। इनकी शोषणपूर्ण नीतियों के चलते यह जरूरत महसूस हुई कि सहकारी समिति बनाई जाए। समिति में दुग्‍ध उत्‍पादकों के ही प्रतिनिधि हों और यह समिति दुग्‍ध उत्‍पादकों के हितों का ध्‍यान रखें।

सरदार पटेल ने निभाया था बड़ा रोल

यह वो समय था, जबकि अंग्रेजों के खिलाफ भारत की आजादी का आंदोलन अंतिम दौर में था। स्वतंत्र भारत की सुगबुगाहट तेज होने लगी थी, लेकिन आजादी की लड़ाई से इतर गुजरात के कैरा में गाय-भैंस का दूध बेचकर घर-बार चलाने वाले किसान दलालों के बीच फंसे थे। उन्हें दूध का उचित दाम नहीं मिल रहा था। दलाल उनके दूध को बेचकर मोटा पैसा कमा रहे थे। दूध का कारोबार ठेकेदारों और दलालों के बीच फंसा था। बिचौलियों के शोषण को रोकने के लिए कंपनी को रजिस्‍टर कराई गई स्थानीय व्यापार कार्टेल द्वारा अपनाई जाने वाली शोषक व्यापार नीतियों ने सहकारी आंदोलन को गति दी। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की सरकार ने फैसला किया कि यही दृष्टिकोण राष्ट्रीय डेयरी विकास नीति का आधार बनना चाहिए। 1950 से डेयरी चलाने का काम श्‍वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन और संस्थापक अध्यक्ष त्रिभुवनदास पटेल को सौंपा गया।

हर दिन 150 लाख लीटर सेल

Amul Brand गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड के अधीन है। GCMMF का प्रदेश में 3 मिलियन दूध उत्पादकों के पास स्वामित्व है। देश में अमूल की 1,44,500 डेयरी सहकारी समितियों में 15 मिलियन से अधिक दुग्ध उत्पादक दूध पहुंचाते हैं। उनके दूध को 184 जिला सहकारी संघों में प्रोसेस किया जाता है। 22 राज्य मार्केटिंग संघ इनकी मार्केटिंग करते हैं।

हर दिन 2.60 करोड़ लीटर से अधिक दूध एकत्रित करता है अमूल

अमूल कंपनी वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, GCMMF हर दिन 18,600 गांवों से लगभग 2 करोड़ 60 लाख लीटर से अधिक दूध एकत्र करता है. इसके बाद ये Amul Milk ब्रांड से मुख्य रूप से गुजरात के अलावा दिल्ली-एनसीआर, पश्चिम बंगाल और मुंबई के मार्केट में सप्लाई होता है. एक दिन में कंपनी करीब 150 लाख लीटर दूध सेल करती है और अकेले दिल्ली-एनसीआर में ही प्रतिदिन की खपत करीब 40 लाख लीटर है।

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