नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आजकल बढ़ती ईकॉमर्स कंपनियों से ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसी कंपनियों से जहां लोगों को घर बैठे कम समय में रोजमर्रा के सामन मंगवाना आसान हो गया है । तो वहीं इन्हें मात्र दस मिनट में समय पर पहुंचाने वाले कर्मचारियों पर अब दबाव बढ़ता ही जा रहा है जहां एक ओर उन्हें कम समय में घर बैठे ग्राहक को सामान पहुंचाने की जल्दी तो दूसरी ओर मालिक का काम को लेकर लगातार दबाव जिससे उन्हें हर रोज इस नौकरी और काम को अपनी जानं पर दांव लगाकर करना पड़ रहा है ऐसा ही एक मामला अभी सामने आया है जिसमें कर्मचारी ने मात्र दस मिनट डिलीवरी का कड़वा सच बताया है जाने क्या कहा?
हाल ही में, ब्लिंकिट से जुड़े कर्मचारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक पोस्ट कर अपना दर्द बयां किया है, जिसमें उसने कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव और नौकरी में आने वाली परेशानियों का जिक्र किया है। कर्मचारी के अनुसार, ऑनलाइन ग्राहक के ऑडर्र आते ही उनसे गोदामों में दौड़ने की उम्मीद की जाती है। जिससे 10 मिनट की डिलीवरी को आसान किया जा सके। लेकिन इस बीच उस कर्मचारी के ऊपर उसकी जांन के परवाह किए बिना उन्हें किस तरह नौकरी करवाई जा रही है जहां एक ओर नौकरी जाने का खतरा तो दूसरी तरफ दस मिनट में पहुंचाने का टारगेट । प्रति पिकिंग आइटम के कारण तनाव कर्मचारी ने दुर्घटनाओं के व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए हैं
पार्ट-टाइम ब्लिंकिट कर्मचारी की रेडिट पोस्ट ने भारत में 10 मिनट की डिलीवरी को लेकर कड़वा सच बताते हुए अपना दर्दं बयां किया है। जिसमें उन्होनें लिखा, हम सभी को 10 मिनट में किराने का सामान या नाश्ता डिलीवर होना पसंद है, लेकिन ज्यादातर लोगों को ये पता नही कि, उस ‘अल्ट्राफास्ट’ सेवा के पीछे क्या चल रहा है। जो आपका सामान मात्र दस मिनट पर पहुंचा रहा है उसपर तो दबाव अलग लेवल का है और ईमानदारी से कहूं तो यें काम बहुत खतरनाक है।
कर्मचारी ने रेडिट पर शेयर किया पोस्ट
पोस्ट के अनुसार, एक ऐसा कर्मचारी जो पढ़ाई के साथ-साथ पिकर और पैकर के रूप में अपनी नौकरी को भी बैलेंस करता है, जिसके साथ उसे नौकरी में आती अत्यधिक प्रेशर और परेशानियों को लेकर अपना अनुभव शेयर किया है। कर्मचारी लगातार तनाव में रहते हैं, कंपनी के ओनर उनपर बिना रुके दबाव डालते रहते है और इसके साथ ही प्रति पिकिंग आइटम इस तनाव को और ज्यादा बढ़ाता है।
‘हमसे चलने नहीं दौड़ने की उम्मीद की जाती’
कर्मचारी ने कहा, हमसे चलने नहीं दौड़ने की उम्मीद की जाती है, क्योंकि हम तो इंसान नही है, डार्क स्टोर के नाम से जाने वाले गोदामों को छोटा, रैक और सामान से भरा हुआ बताया कहा, कर्मचारियों से उम्मीद की जाती है कि वे ऑर्डर लेने, भीड़भाड़ वाली जगहों और गलियों से गुजरकर उसे मात्र दस मिनट में पहुंचाने समय के साथ दौड़ने के दौरान सिर्फ तेजी से न चलें, बल्कि दौड़ें। जिसके परिणामस्वरूप दुर्घटनाओं से सामना करना पड़ता है, जिसमें एक अन्य कर्मचारी से टक्कर भी शामिल है, इसके चलते ही मेरा फोन भी टूट गया।
‘मेरा फोन भी टूट चुका है’
पार्ट-टाइम ब्लिंकिट पीड़ित कर्मचारी ने कहा, ‘मेरे साथ कुछ दुर्घटनाएं हुई हैं। एक बार, मैं दूसरे व्यक्ति से टकरा गया और मेरा फोन टूट गया। इस तरह की चीजें लगभग रोज ही होती है, क्योंकि यहां सब कुछ जल्दी-जल्दीकरना होता है बिना किसी सुरक्षा के हमें PPI प्रति पिकिंग आइटम नामक सिस्टम पालन करना पड़ता है। अगर किसी आइटम को खोजने में कुछ सेकंड भी ज्यादा लगे तो हो सकता है कि वह खो गया हो या स्टॉक में ना हो तो भी प्रबंधक आपको लॉग आउट करके घर जाने के लिए कहता है। उच्च अधिकारियों से दबाव बहुत ज्यादा होने पर प्रबंधक इसे कर्मचारियों पर डाल देते हैं।





