नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपने जनसुराज पदयात्रा के दौरान लोगों से किए गए संवाद को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी को सिर्फ 4 फैक्टरों पर काम करके हराया जा सकता है। बीजेपी ने अपने चारों तरफ इसके आवरण चढ़ा रखे हैं। अगर इन आवरणों को हटा दिया जाए तो बीजेपी को आराम से हराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टियों को जब भी बीजेपी के खिलाफ मैदान में उतरना होगा। उसे इन चारों आवरणों से ही लड़ना होगा।
पहला हिंदुत्व फैक्टर
प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी को जो वोट मिलते हैं, उसमें सबसे प्रमुख कारण है उसका हिंदू सेंट्रिक होना। जिसपर बीजेपी की विचारधारा टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि ये बहुत बड़ा वर्ग है। जो बीजेपी को वोट देता है। उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि हिंदुत्व की रक्षा के लिए बीजेपी का होना जरूरी है।
दूसरा राष्ट्रवाद फैक्टर
बीजेपी ने अपने आपको राष्ट्रवादी पार्टी के रूप में प्रचारित किया है। देश में जब जी-20 सम्मेलन हुआ था। तब पूरे गांव देहात में ये चर्चा होने लगी थी। लोग आपस में ये बात करते थे कि बीजेपी ने देश को कितना आगे बढ़ाया कि आज देश में जी-20 सम्मेलन हो रहा है। मोदी ने विदेशों में देश की नाक ऊंची कर रखी है।
लाभार्थी का मामला
प्रशांत किशोर कहते हैं कि केंद्र से जुड़ी योजनाओं से करोड़ों लोग लाभान्वित हुए हैं। मुफ्त अनाज, किसान सम्मान निधि, पीएम आवास और उज्जवला योजना से लोग सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं। इसलिए लोग खुलकर बीजेपी को वोट देते हैं। केंद्र कोई भी स्कीम लॉन्च करती है तो बीच में कोई बिचौलिया नहीं होता। जिसके चलते इसका फायदा लोगों को सीधे मिलता है।
बीजेपी का बेहतरीन संगठन
प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी को वोट मिलने का चौथा सबसे बड़ा कारण उसका संगठन है। बीजेपी हर चुनाव जीतने के लिए लड़ती है। ये सिर्फ उसके संगठन के चलते हो पाता है। यहां चुनाव लड़ने के लिए पैसे दिए जाते हैं। आप किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ते हैं तो आपको पैसे खर्च करने पड़ते हैं चुनाव लड़ने के लिए। जबकि बीजेपी आपको खुद पैसे देती है। इसी संगठन की वजह से बीजेपी को वोट मिलता है।
पीके ने कहा कि बीजेपी को हराने के लिए इन्हीं 4 फैक्टरों से लड़ना होगा। लोगों को जमीन पर उतरकर ये बताना होगा कि बीजेपी सिर्फ हिन्दुत्व का ढोंग करती है। कोई हिंदुत्व को खत्म नहीं कर सकता। पीके ने आगे कहा कि लोगों को ये बताना होगा कि बीजेपी के राष्ट्रवाद और असल राष्ट्रवाद में क्या अंतर है।
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