नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । नवरात्रि का पावन पर्व में मां दुर्गा की भव्य पूजा और आराधना का माहौल बनता है। यह नौ दिवसीय उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जिसमें भक्तजन व्रत, भजन-कीर्तन और रंगीन गरबा नृत्य से भक्तिभाव प्रकट करते हैं।
अगर आप नवरात्रि में मां दुर्गा के दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं, तो दिल्ली-एनसीआर के ये 5 प्रमुख देवी मंदिर जरूर जाएं। यहां भव्य पूजा-अर्चना और भक्तिमय माहौल का अनुभव मिलेगा, जो आपके नवरात्रि पर्व को और भी खास बना देगा। बताइए, कौन-कौन से मंदिर जानना चाहेंगे आप?
शीतला माता मंदिर, गुरुग्राम
दिल्ली के करीब गुरुग्राम शहर में स्थित शीतला माता मंदिर नवरात्रि में दर्शन के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पावन अवसर पर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। भक्त श्रद्धा से शीतला माता की पूजा करती हैं, जिन्हें देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है, जिससे मंदिर का माहौल भक्तिमय और दिव्य हो जाता है।
कालका जी मंदिर, दिल्ली
कालकाजी मंदिर, दिल्ली के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। माना जाता है कि यहां माता काली का वास है, जिसके कारण नवरात्रि के दौरान लाखों श्रद्धालु यहां माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर नवरात्रि पर्व का विशेष आकर्षण बन जाता है।
नवदुर्गा शक्ति मंदिर, खुर्जा
उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र में स्थित खुर्जा शहर अपनी सिरेमिक इंडस्ट्री के लिए विश्व प्रसिद्ध है। साथ ही, यहां माता रानी का एक भव्य मंदिर भी है, जो नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को आकर्षित करता है। हर दिन हजारों भक्त नवरात्रि में इस मंदिर में माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिससे यहां का वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो जाता है।
अवंतिका देवी, आहार
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में स्थित अवंतिका देवी मंदिर एक अत्यंत पौराणिक और श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि माता रुक्मणि ने भगवान श्रीकृष्ण से विवाह की कामना के साथ इसी मंदिर में पूजन किया था। नवरात्रि के दौरान यह मंदिर श्रद्धालुओं से भर जाता है, जहां भक्त मां अवंतिका देवी का आशीर्वाद लेने दूर-दूर से आते हैं।
झंडेवाला देवी मंदिर, दिल्ली
दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में शामिल झंडेवाला देवी मंदिर नवरात्रि में श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। नवरात्रों के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जो भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के रंग में रंग देता है।




