नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जब भी हम लोग किसी मुसीबत का शिकार होते हैं तो हमारे मन में सबसे पहला ख्याल आता है पुलिस का, जहां हम अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं। हालांकि अक्सर लोग पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने के दौरान FIR और Zero FIR (FIR vs Zero FIR) को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं। जानकारी के अभाव में कई बार पुलिस यह कहकर शिकायत लेने से मना कर देती है कि मामला उनके क्षेत्र का नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि आम नागरिक अपने अधिकारों को समझें, ताकि जरूरत पड़ने पर सही कदम उठा सकें।
FIR क्या होती है और कब दर्ज होती है? (FIR vs Zero FIR)
FIR यानी First Information Report किसी अपराध की पहली आधिकारिक सूचना होती है, जिसे उसी थाने में दर्ज किया जाता है जहां घटना घटी हो। इसे दर्ज करने के बाद पुलिस मामले की जांच शुरू करती है और आगे की पूरी कानूनी प्रक्रिया इसी के आधार पर चलती है। सामान्य मामलों में पुलिस संबंधित क्षेत्राधिकार (ज्यूरिस्डिक्शन) के आधार पर ही FIR दर्ज करती है।
Zero FIR क्या है और क्यों है जरूरी?
Zero FIR एक ऐसी सुविधा है, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज करा सकता है, चाहे घटना कहीं भी हुई हो। इस FIR को शुरुआती तौर पर “0” नंबर दिया जाता है और बाद में इसे सही थाने में ट्रांसफर कर दिया जाता है। यह व्यवस्था खासतौर पर इमरजेंसी और गंभीर मामलों में बनाई गई है, ताकि पीड़ित को तुरंत मदद मिल सके।
कानून के अनुसार पुलिस Zero FIR दर्ज करने से मना नहीं कर सकती। अगर ऐसा होता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ शिकायत की जा सकती है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि Zero FIR आपका कानूनी अधिकार है और इसके जरिए आप बिना समय गंवाए न्याय की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।




