नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज डेस्क। हरियाणा में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। हरियाणा में बीजेपी-जेजेपी गठबंधन को लेकर सरगर्मी लगातार बढ़ी हुई है। दोनों दलों का गठबंधन टूटने की चर्चाएं जोरों पर हैं। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, भाजपा नेताओं का मानना है कि अगर वह जेजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है।
फिलहाल हरियाणा में 10 की 10 लोकसभा सीटों पर भाजपा के ही सांसद हैं। ऐसे में अगर भाजपा-जेजेपी के एकसाथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो जेजेपी को भी कुछ सीटें देनी पड़ेगी।
गठबंधन को लेकर अच्छा फीडबैक नहीं
गौरतलब है कि सिरसा रैली के बाद भाजपा अलाकमान ने हरियाणा बीजेपी की इकाई से ताजा फीडबैक लिया था। पार्टी इकाई के फीडबैक में जेजेपी के साथ गठबंधन को लेकर नेगेटिव रिपोर्ट मिली है, रिपोर्ट में जेजेपी के साथ गठबंधन को अच्छा नहीं बताया गया है। बता दें कि इससे पहले भी कई नेता जेजेपी से अलग होने की बात कह चुके हैं।
गठबंधन टूटने से नहीं होगा नुकसान
जेजेपी के साथ गठबंधन टूटने के बाद भी भाजपा को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। इसकी बड़ी वजह अभी हाल ही में बीजेपी प्रभारी बिप्लब देव से निर्दलीय विधायकों की मुलाकात बताई जा रही है। बीजेपी निर्दलीय विधायकों के सहारे सरकार में बनी रह सकती है। अभी खुद भाजपा के पास कुल 90 विधानसभा सीटों में से 41 सीटें हैं। सरकार के पास बहुमत के लिए 46 विधायक होने चाहिए ऐसे में अगर 4 निर्दलीय विधायक खुलकर सरकार के साथ आ जाते हैं और बता दें कि हलोपा संयोजक और विधायक गोपाल कांडा भी भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर चुके है। ऐसे में जेजेपी के साथ गठबंधन तोड़कर भी भाजपा इन 5 विधायकों को मिलाकर सरकार में बनी रह सकती है।





