बीजापर, 09 जून (हि.स.)। सिलगेर मामले को लेकर पिछले महीने भर से चला आ रहा आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। हालांकि मीडिया और सोशल मीडिया में यह प्रचारित किया जाता रहा कि आंदोलन समाप्त हो गया है। आंदोलनरत ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मांगे नहीं मानी जाएगी आंदोलन अनवरत जारी रहेगा और वे बरसात में भी डटे रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि 08 जून को बड़े प्रदर्शन की तैयारी को देखते हुए जिला प्रशासन ने उसूर ब्लॉक को जोखिम क्षेत्र घोषित कर दिया, जिससे पत्रकार, राजनीतिज्ञ, समाजसेवी सिलगेर की स्थिति देखने के लिए नहीं पहुंच सके। प्राप्त जानकारी के अनुसार आंदोलनरत ग्रामीण इस बात से आक्रोशित थे कि सरकार द्वारा भेजे गए विधायकों और सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से हुई चर्चा के अनुसार उनको लिखित रूप से प्रशासन ने उस तारीख तक कोई आश्वासन नहीं दिया था और न ही और कोई पहल की थी। बाद में सोनी सोरी की पहल पर कुछ आंदोलनरत आदिवासी कलेक्टर से मिलने के लिए तैयार हुए और कलेक्टर से उन्होंने चर्चा किया। चर्चा में क्या निष्कर्ष निकला स्पष्ट नहीं किया गया। आंदोलन स्थगित होने की खबर प्रचारित होने के साथ ही सिलगेर का आंदोलन सुकमा जिला मुख्यालय में जारी रखने की बात सामने आई। लेकिन आज आंदोलनरत ग्रामीणों के कई प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जब तक कि उनकी मांगे मान नहीं ली जाती उनका आंदोलन उसी जगह पर लगातार जारी रहेगा। सोनी सोरी ने कहा कि मानसून और कोरोना को देखते हुए आंदोलन खत्म करना जरूरी है। दूर-दूर से इस आंदोलन में शामिल होने के लिए ग्रामीण आए हुए हैं, अब उनके खेती-बाड़ी का समय शुरू हो गया है। अत: आंदोलन खत्म करना ही उचित होगा, इसीलिए समझाया लेकिन इसमें सहमति नहीं बनी, अब आंदोलन जारी रहेगा। हिन्दुस्थान समाचार/राकेश पांडे




