बिहार जातिगत जनगणना रिपोर्ट सार्वजनिक, जानिए BJP के किस नेता ने क्या कहा? मायावती ने भी कही ये बड़ी बात

Delhi: बिहार में जातिगत जनगणना रिपोर्ट जारी कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव सामाजिक न्याय का दावा कर रहे हैं जबकि विपक्षी पार्टी भाजपा ने रिपोर्ट में खामियां बताई।
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नई दिल्ली, हि.स.। बिहार में जातिगत जनगणना रिपोर्ट दो अक्टूबर को जारी कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सामाजिक न्याय का दावा कर रहे हैं जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) रिपोर्ट कार्ड में खामियां बताकर हमलावर हो गई है। भाजपा नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल के दौरान सामाजिक न्याय की दिशा में कितना कार्य हुआ और दोनों के सुशासन का ब्यौरा मांग रही है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मीडिया में प्रतिक्रिया दी

वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मीडिया में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बिहार की गरीब जनता में भ्रम फैलाने के सिवा कुछ नहीं है। नीतीश कुमार के 15 साल और लालू यादव के 18 साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए था कि उन्होंने अपने कार्यकाल में गरीबों का कितना उद्धार किया, कितने लोगों को नौकरी दी।

बिहार भाजपा प्रमुख सम्राट चौधरी

बिहार भाजपा प्रमुख सम्राट चौधरी ने कहा है कि जारी किए गए जाति सर्वेक्षण के लिए इस्तेमाल किए गए तंत्र पर भी भाजपा गौर करेगी। उन्होंने कहा कि जब जाति सर्वेक्षण किया था, तब सर्वेक्षण में समुदायों की वृद्धि और गिरावट के वित्तीय और सामाजिक डेटा को भी शामिल किया जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं दिख रहा है।

विजय सिन्हा ने हमला बोला

बिहार में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने कहा है कि रिपोर्ट में कुछ नयापन नहीं है लेकिन इसे चमत्कार बताया जा रहा है। गणना की सच्चाई क्या है? और बिहार का कितना कल्याण और उत्थान हुआ, यह देखना शेष है। उन्होंने कहा कि इनके पास ना विजन, ना नीति और ना ही नीयत है। चुनाव के समय अब यह कौन-सा चमत्कार करेंगे यह हर समाज के लोग समझते हैं।

भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी

भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि जब भाजपा बिहार सरकार का हिस्सा थी, उस सरकार ने ही बिहार में जाति आधारित सर्वे कराने का फैसला लिया था। आज बिहार सरकार ने डेटा सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा डेटा का विश्लेषण कर रही है। विश्लेषण के बाद ही हम इस पर कोई टिप्पणी करेंगे।

भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने क्या कहा?

भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार में जातिगत जनगणना करा कर पिछड़े समाज के साथ अन्याय किया। आंकड़ों के अनुसार 18 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और मुस्लिम धर्म जाति को नहीं मानता, 22 प्रतिशत अनुसूचित जाति व जनजाति की आबादी है, तकरीबन 16 प्रतिशत सवर्ण जातियों की आबादी है, इस हिसाब से केवल 45 प्रतिशत पिछड़े वर्ग की आबादी है। मुसलमानों को पिछड़े वर्ग में शामिल कर मुस्लिम धर्म के सिद्धांतों की बलि दी जा रही है।

जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट पर यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने कहा है कि बिहार सरकार केवल अपने वोटों को विभाजित करने के लिए विभिन्न जातियों के बीच भ्रम पैदा करना चाहती है। इसलिए समय से पहले रिपोर्ट कार्ड जारी कर दिया।

मायावती की प्रतिक्रिया

मायावती ने एक्स पोस्ट में कहा कि बिहार सरकार द्वारा कराए गए जातीय जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक होने की खबरें आज काफी सुर्खियों में हैं। उस पर गहन चर्चाएं जारी हैं। कुछ पार्टियां इससे असहज ज़रूर हैं, लेकिन बसपा के लिए ओबीसी के संवैधानिक हक के लंबे संघर्ष की यह पहली सीढ़ी है। बसपा को खुशी है कि देश की राजनीति उपेक्षित 'बहुजन समाज' के पक्ष में इस कारण नया करवट ले रही है।

इसका नतीजा है कि एससी, एसटी आरक्षण को निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी बनाने तथा घोर ओबीसी एवं मंडल विरोधी जातिवादी एवं साम्प्रदायिक दल भी अपने भविष्य के प्रति चिंतित नजर आने लगे हैं। यूपी सरकार को अब अपनी नीयत व नीति में जनभावना व जन अपेक्षा के अनुसार सुधार करके जातीय जनगणना अविलंब शुरू करा देना चाहिए, लेकिन इसका सही समाधान तभी होगा जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर जातीय जनगणना कराकर उन्हें उनका वाजिब हक देना सुनिश्चित करेगी।

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