नई दिल्ली। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी समेत कुल 13 सैन्य अफसरों का बुधवार दोपहर एक दुखद हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया। जनरल बिपिन रावत जिस MI-17 हेलीकॉप्टर में सवार थे, उसे दुनिया के सबसे सुरक्षित हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है। हालांकि, हादसा किस वजह से हुआ यह अभी जांच का विषय है।
इन सबके बीच सबसे अहम भूमिका होती है एक हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) की। आज के इस आर्टिकल में हम आपको करियर गाइड के रूप में हेलीकॉप्टर पायलट कैसे बनें? इसी बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
हेलीकॉप्टर और विमान बचपन से ही बच्चों में कौतूहल का विषय रहते है। कई बच्चे बड़े होकर हेलीकॉप्टर उड़ाने का सपना देखते हैं। ऐसे ही बच्चों के लिए एविएशन इंडस्ट्री के दरवाजे खुले हैं। 12वीं पास करने के बाद एक हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) बनने के सपनों को पंख लगाए जा सकते हैं।
हेलीकॉप्टर पायलट की भूमिका
आज हेलीकॉप्टर पायलट की भूमिका एविएशन इंडस्ट्री में अहम है। एक सैन्य हेलीकॉप्टर पायलट हो या फिर कमर्शियल हेलीकॉप्टर पायलट, इस जॉब में पायलट के पास सबसे ज्यादा जिम्मेदारियां होती है। उन्हें ना सिर्फ हेलीकॉप्टर में सवार यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखना पड़ता है, बल्कि हेलीकॉप्टर को भी किसी प्रकार क्षति पहुंचने से रोकना होता है। इसीलिए इसलिए हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) बनने के लिए कोर्स में दाखिला केवल तभी मिलता है जब कैंडिडेट प्रवेश परीक्षा में सफल हो जाता है। परीक्षा में सफल होने के बाद 2 साल का कोर्स कराया जाता है, जिसमें घंटों की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है।
कैसे बन सकते हैं हेलीकॉप्टर पायलट
हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) बनने के लिए सबसे पहले कैंडिडेट को आईजीआरयूए (IGRUA) एंट्रेंस एग्जामिनेशन पास करना होता है। इस परीक्षा को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी परीक्षा भी कहा जाता है। यह परीक्षा डीजीसीए (DGCA) यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन गवर्नमेंट ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित कंडक्ट की जाती है।
इस लिखित परीक्षा में पास होने के बाद कैंडिडेट को मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाता है। मेडिकल टेस्ट में पास होने के बाद इंटरव्यू लिया जाता है। सफलतापूर्वक तीनों चरण पास करने वाले उम्मीदवारों को हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) बनने के कोर्स में दाखिला मिल जाता है।
शैक्षिक योग्यता
हेलीकॉप्टर पायलट बनने के लिए अभ्यार्थी का मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ विषयों में कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास होना जरूरी है। इसके साथ ही कैंडिडेट को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) बनने के लिए सबसे पहले स्टूडेंट पायलट लाइसेंस की जरूरत होती है, जिसके लिए कैंडिडेट की उम्र कम से कम 16 साल होनी जरूरी है। जबकि एक पायलट के रूप में लाइसेंस हासिल करने के लिए 17 साल जबकि कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए कैंडिडेट की उम्र 18 साल होनी चाहिए।
शारीरिक योग्यता
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कैंडिडेट की लंबाई कम से कम 162.2 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
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आवेदक की आंखों की दृष्टि भी बिल्कुल ठीक होनी चाहिए।
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कलर ब्लाइंडनेस नहीं होना चाहिए।
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कैंडिडेट मानसिक और शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है। उसके पास लेवल-2 का मेडिकल और मानसिक हेल्थ सर्टिफिकेट होना चाहिए।
कितनी होती है फीस
हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) बनने के लिए किसी भी कैंडिडेट को लगभग 18 से लेकर 20 लाख रुपए तक की फीस का भुगतान करना पड़ सकता है। दरअसल, यह एक महंगा कोर्स है इसलिए इसकी इतनी ज्यादा फीस है। लेकिन कोर्स करने के बाद कैंडिडेट के सामने एक सुनहरा भविष्य होता है।
टॉप इंस्टिट्यूट
भारत में हेलीकॉप्टर पायलट बनने के लिए कई संस्थान हैं, जहां से आप हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) बन सकते हैं। यदि आप किसी अच्छे और टॉप इंस्टीट्यूट से कोर्स करेंगे तो तब आपको नौकरी के लिए किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी। भारत के कुछ प्रतिष्ठित और टॉप एशियन इंस्टिट्यूट इस प्रकार से हैं-
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकैडमी
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अहमदाबाद एवियशन एंड एयरोनॉटिक्स लिमिटेड
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मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब
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बॉम्बे फ्लाइंग क्लब
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नेशनल फ्लाइंग ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट
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राजीव गांधी नेशनल फ्लाइट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट
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ओरियंट फ्लाइट स्कूल चेन्नई
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पांडुचेरी ठाकुर कॉलेज ऑफ एविएशन
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गवर्नमेंट फ्लाइंग क्लब लखनऊ
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गवर्नमेंट एवियशन ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट भुवनेश्वर
हेलीकॉप्टर पायलट के सब्जेक्ट
हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) बनने के लिए जब कैंडिडेट को एडमिशन मिल जाता है, तो उन्हें कई प्रकार की थियोरी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है। कोर्स के सब्जेक्ट की बात करें तो इनमें फ्लाइट ट्रेनिंग प्रोसेस, फ्लाइट आवर्स- सोलो फ्लाइट्स एंड डुअल फ्लाइट्स, बेसिक फ्लाइट इंस्ट्रूमेंट्स, पावर ऑफ स्टॉल्स, स्टेबिलिटी एंड कंट्रोल, ट्रेनिंग एयरप्लेन, गो अराउंड प्रोसीजर्स, मन्यूवरिंग ड्यूरिंग स्लो फ्लाइट, ग्रेडिंग क्राइटेरिया, पावर ऑन स्टॉल्स, एयरफ्रेम, एरो मेडिकल फैक्टर्स, फोर्सिज एक्टिंग ऑन एयरप्लेन, फ्लाइट फिजियोलॉजी, वी ओ आर नेविगेशन आदि की बारीकी से ट्रेनिंग दी जाती है।
क्या है जॉब के अवसर
हेलीकॉप्टर पायलट बनने के बाद कैंडिडेट को ढेरों कैरियर विकल्प मिल जाते हैं। वह चाहे तो प्राइवेट पायलट बन सकता है या फिर भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना या आर्मी में पायलट के रूप में भी काम कर सकता है। उसे इस प्रकार प्राइवेट (How to become Helicopter Pilot) और निजी कंपनियों में काम करने का अवसर मिल जाता है जहां पर वह अपनी योग्यता के अनुसार तरक्की पा सकता है।
कितनी मिलती है सैलरी
हेलीकॉप्टर पायलट बनने के बाद कैंडिडेट को शुरूआत में 80,000 रुपए से लेकर 1.5 लाख रुपए तक प्रति माह सैलरी मिलती है। एक बार एक्सपीरियंस हासिल कर लिया जाए तो उसे 3.5 लाख रुपए तक का वेतन मिलता है। इस प्रकार आकर्षक वेतन के साथ साथ एक हेलीकॉप्टर पायलट (How to become Helicopter Pilot) को कुछ अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं जो कि उसकी कंपनी के ऊपर निर्धारित करती हैं।
क्या है हेलीकॉप्टर पायलट के कार्य
हेलीकॉप्टर पायलट के काम जोखिम और जिम्मेदारियों से भरा है। एक हेलीकॉप्टर पायलट का काम सिर्फ यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने तक सीमित नहीं है। यात्रियों की सुरक्षा और जान की जिम्मेदारी पायलट के ऊपर ही होती है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर के सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग करने की जिम्मेदारी के साथ हेलीकॉप्टर की सुरक्षा भी पायलट (How to become Helicopter Pilot) के हाथ में होती है। हेलीकॉप्टर उड़ाते समय पायलट को चारों ओर नजर बनाए रखनी पड़ती है, ताकि विमान को किसी भी संभावित अनहोनी से बचाया जा सके। किसी भी आपात स्थिति में हेलीकॉप्टर पायलट को त्वरित फैसला लेना होता है।





