Adtiya L1 Mission: आदित्य एल-1 ने सूरज की तरफ बढ़ाया एक और कदम, पृथ्वी की चौथी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित

ISRO Sun Mission: ISRO द्वारा लॉन्च सूर्य मिशन Aditya-L1 ने चौथी बार अपनी कक्षा बदली है। अब आदित्य एल-1 पृथ्वी के चौथी कक्षा में पहुंच गया है। इसे अर्थ बाउंड मैन्यूवर (EBN#4) कहा गया है।
ISRO Sun Mission
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। ISRO द्वारा लॉन्च सूर्य मिशन Aditya-L1 ने चौथी बार अपनी कक्षा बदली है। अब आदित्य एल-1 पृथ्वी के चौथी कक्षा में पहुंच गया है। इसे अर्थ बाउंड मैन्यूवर (EBN#4) कहा गया है। अब इसका अगला पड़ाव पृथ्वी की कक्षा को छोड़ सूर्य की कक्षा की अग्रसर होने का है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) ने एक्स पर यह जानकारी साझा की है। ISRO का सूर्य मिशन अभी पृथ्वी के चारों तरफ 256 km x 121973 km की अंडाकार कक्षा में घूम रहा है। इसकी ऑर्बिट बदलते समय मॉरशिस, बेंगलुरु के ISTRAC, श्रीहरिकोटा के SDSC-SHAR और पोर्ट ब्लेयर के इसरो सेंटर से निगरानी की गई।

आदित्य एल 1 की कक्षा को बदला गया

इसरो ने कहा है कि 15 सितंबर को आदित्य एल 1 की कक्षा को बदला गया है। ISRO का सूर्य मिशन अभी पृथ्वी के चारों तरफ 256 km x 121973 km की अंडाकार कक्षा में घूम रहा है। इसकी ऑर्बिट बदलते समय मॉरशिस, बेंगलुरु के ISTRAC, श्रीहरिकोटा के SDSC-SHAR और पोर्ट ब्लेयर के इसरो सेंटर से निगरानी की गई। अब 19 सितंबर को रात दो बजे इसे लैग्रेंज पॉइंट एल 1 की कक्षा में स्थापित करने के लिए ऑर्बिट बढ़ाई जाएगी। जिसे EBN#5 कहा जा रहा है। वो धरती के चारों तरफ उसका आखिरी ऑर्बिट मैन्यूवर होगा। धरती के चारों तरफ ऑर्बिट इसलिए बदला जा रहा है ताकि वह इतनी गति हासिल कर ले कि वह 15 लाख km की लंबी यात्रा को पूरा कर सके। इसके बाद वह सूरज की तरफ मौजूद L1 प्वाइंट यानी लैरेंज प्वाइंट की तरफ निकल जाएगा। फिर वह करीब 109 दिन की यात्रा हैलो ऑर्बिट में करेगा।

फरवरी या मार्च में मिलेगी पहली तस्वीर

उल्लेखनीय है कि दो सितंबर को भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 की लॉन्चिंग की गई थी। इसरो ने पीएसएलवी सी 57 लॉन्च व्हीकल से आदित्य एल 1 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। यह 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करके एल वन प्वाइंट पर स्थापित होगा। तब वह हर दिन 1440 तस्वीरें भेजेगा। ताकि सूर्य की बड़े पैमाने पर स्टडी की जा सके। यह तस्वीरें आदित्य में लगा विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) लेगा। आदित्य-L1 से सूरज की पहली तस्वीर फरवरी या मार्च में मिलेगी।

क्या करेगा आदित्य-L1?

  • सौर तूफानों के आने की वजह की जांच और सौर लहरों और उनका धरती के वायुमंडल पर क्या असर होता है।

  • आदित्य सूरज के कोरोना से निकलने वाली गर्मी और गर्म हवाओं की स्टडी करेगा।

  • सौर हवाओं के विभाजन और तापमान की स्टडी करेगा।

  • सौर वायुमंडल को समझने का प्रयास करेगा।

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