कोरोनोवायरस संकट से दुनिया में गरीबों की संख्या बढ़कर 1.1 अरब होने की आशंका
कोरोनोवायरस संकट से दुनिया में गरीबों की संख्या बढ़कर 1.1 अरब होने की आशंका

कोरोनोवायरस संकट से दुनिया में गरीबों की संख्या बढ़कर 1.1 अरब होने की आशंका

नई दिल्ली, 12 जून (हि.स.)। शोधकर्ताओं ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा कि कोरोनोवायरस महामारी से पैदा आर्थिक गिरावट और 395 मिलियन लोगों को अत्यधिक गरीबी में डुबो सकती है। इससे दुनिया भर में प्रतिदिन 1.90 डॉलर से कम आय पर रहने वालों की कुल संख्या को बढ़ाकर एक अरब से अधिक हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के हिस्से यूएनयू-डब्ल्यूआईडीईआर ( UNU-WIDER) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कई परिदृश्यों को ध्यान में रखा गया है। इसमें विश्व बैंक की विभिन्न गरीबी रेखाओं- प्रति दिन 1.90 डॉलर या उससे कम पर अत्यधिक गरीबी से लेकर एक दिन में 5.50 डॉलर से कम पर उच्चतर गरीबी की परिभाषाओं को ध्यान में रखा गया। प्रति व्यक्ति आय या खपत में 20% संकुचन के सबसे खराब परिदृश्य के तहत अत्यधिक गरीबी में रहने वालों की संख्या 1.12 अरब हो सकती है। उच्च-मध्यम आय वाले देशों में 5.50 डॉलर की सीमा तक लागू किए गए समान संकुचन से 3.7 अरब से अधिक लोग या दुनिया की आधी से अधिक आबादी इस गरीबी रेखा से नीचे जा सकती है। रिपोर्ट के लेखकों में से एक एंडी सुमनेर ने कहा, "दुनिया के सबसे गरीब लोगों के लिए परिदृश्य गंभीर है, जब तक कि सरकारें उनके नुकसान को जल्दी से जल्दी कम करने की कोशिश नहीं करती हैं। इसका नतीजा यह होगा कि गरीबी में कमी के पिछले 20-30 साल के प्रयासों का लाभ खत्म हो सकता है और गरीबी को खत्म करने का संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य एक अधूरे सपने जैसा हो जाएगा।" किंग्स कॉलेज लंदन और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि गरीबी बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैल जाएगी। अत्यधिक गरीबी में डूबने के खतरे वाले लोगों की सबसे बड़ी संख्या दक्षिण एशिया में दिखाई देने की उम्मीद है, जो मुख्य रूप से घनी आबादी वाले भारत में रहती है। इसके बाद उप-सहारा अफ्रीका का स्थान होगा, जहां से लगभग गरीबों में एक-तिहाई वृद्धि होगी। सोमवार को विश्व बैंक ने कहा कि महामारी के कारण उसे 70-100 मिलियन लोगों के अत्यधिक गरीबी में धकेल दिये जाने की उम्मीद है। हिन्दुस्थान समाचार/राकेश सिंह-hindusthansamachar.in

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