Loksabha Elections 2024, Mainpuri: अखिलेश यादव ने पत्नी-बेटी के साथ डाले वोट, ससुर की विरासत बचा पाएंगी डिंपल?

Mainpuri LokSabha Seat: डिंपल यादव कन्नौज से हार गई थीं बाद में मुलायम की मौत के बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने ने मैनपुरी सीट जीत ली थी।
डिंपल यादव, अखिलेश यादव और स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव।
डिंपल यादव, अखिलेश यादव और स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव। रफ्तार।

नई दिल्ली, रफ्तार। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में आज उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर आज वोटिंग हो रही है। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी डिंपल यादव और बेटी के साथ मतदान किया। बता दें, यूपी की सबसे हाईप्रोफाइल सीट मैनपुरी है। इस सीट पर 28 साल से समाजवादी पार्टी का कब्जा है। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मुलायक सिंह यादव की बहू डिंपल यादव प्रत्याशी हैं। वहीं, उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी जयवीर सिंह से है। हालांकि डिंपल यादव कन्नौज से भी चुनाव लड़ रहीं हैं, जहां पिछली बार उन्हें हार मिली थी। डिंपल ने मुलायम सिंह की मौत के कारण खाली सीट मैनपुरी से जीत दर्ज की थी। मुलायम मैनपुरी से पांच बार–2019, 2014, 2009, 2004 और 1996 में जीते थे। फिर उनकी मौत के बाद दिसंबर 2022 के उपचुनाव में डिंपल ने यहां 2.88 लाख वोटों से जीत हासिल की थी। तब यह वोट काफी हद तक सहानुभूति वोट के रूप में देखा गया था।

अकेले पड़ीं डिंपल

इस चुनाव में अखिलेश यादव कन्नौज में प्रचार किए हैं। चाचा शिवपाल यादव अपने बेटे की सीट बदायूं में व्यस्त हैं। डिंपल अकेले मैदान में हैं। वह अच्छे से जानती हैं कि कब मुलायम के नाम का जिक्र करना है। मतदाताओं से उनकी लिखित अपील में हर बार नेताजी यानी मुलायम सिंह का जिक्र किया गया है। उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाने की कसम भी खाई है।

गैर यादवों को साधने की कोशिश

इस चुनाव में डिंपल ज्यादातर समय जटवारा और इमालिया समेत गैर-यादव बहुल गांवों में बिता रही हैं। दोनों गांव भोगांव सीट में आते हैं। यहां 2019 में मुलायम सिंह के जीतने के बाद बीजेपी काफी आगे थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी की पांच सीटों में से सपा तीन सीटें ही जीत सकी थी। दो पर भाजपा ने बाजी मारी थी। अखिलेश करहल से विधायक चुने गए थे। शिवपाल सिंह यादव जसवंत नगर से जीते थे।

अखिलेश यादव के प्रति नाराजगी

सपा का आधार यादव वोट बैंक को माना जाता है। हालांकि कई लोगों को लगता है कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है। ओबीसी लोध राजपूत समुदाय के प्रभुत्व वाले जटपुरा गांव के निवासी प्रभु राम लोधी का कहना है कि नेता जी यहां हर किसी को परिवार की तरह मानते थे, लेकिन पार्टी के मौजूदा नेता अहंकारी हैं। अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में मेरे रिश्तेदार भाजपा को वोट देते हैं और मैं भी ऐसा ही कर सकता हूं। जटवारा गांव के लोध जवाहर लाल बताते हैं कि जब बाबूजी (कल्याण सिंह) की मौत हुई तो अखिलेश श्रद्धांजलि देने उनके घर नहीं गए। जब एक माफिया मुख्तार अंसारी की मौत हुई तो वह और सपा नेता गाज़ीपुर पहुंचे।

भाजपा के लिए मैनपुरी सबसे बड़ी चुनौती

मैनपुरी भाजपा के लिए चुनौती है। भले वह प्रदेश में सत्ता में है, लेकिन कभी मैनपुरी नहीं जीत पाई। पिछले दशक में मैनपुरी में चार लोकसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से दो उपचुनाव भी शामिल हैं। हर बार सपा ने 50% से अधिक वोट पाए हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में सकारात्मक संकेत मिले थे। पांच विधानसभा क्षेत्रों में से भाजपा ने दो-मैनपुरी और भोगांव जीती थी। तीन पर सपा ने जीत दर्ज की थी।

2024 में सपा को चुनौती मिलेगी!

कुछ भाजपा नेताओं का कहना है कि 2024 में सपा को चुनौती मिलेगी। भाजपा जिलाध्यक्ष राहुल चतुर्वेदी एक इंटरव्यू में कहा है कि पूरे देश में प्रधानमंत्री मोदी की छवि अच्छी है। यह प्रधानमंत्री के रूप में मोदीजी का तीसरा कार्यकाल होगा। भाजपा इस बार मैनपुरी सीट जीतेगी।

कौन हैं भाजपा उम्मीदवार जयवीर सिंह?

मैनपुरी से भाजपा के उम्मीदवार जयवीर सिंह हैं। जयवीर ने मैनपुरी विधानसभा सीट जीती थी। उनको प्रदेश के पर्यटन मंत्री पद से पुरस्कृत किया गया था। ब्लॉक प्रमुख से विधायक तक का सफर पूरा किया है। जयवीर ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मैं जीतूंगा, क्योंकि यादव परिवार के लोग सिर्फ चुनावों के दौरान दिखाई देते हैं। मैं स्थानीय हूं और लोग मुझे जानते हैं। र रहे हैं

पार्टी- लोस चुनाव 2019 और चुनाव 2014 (वोट प्रतिशत)

बीजेपी : 44.09%------------23.14%

बीएसपी और सपा : 14.29%

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