पंजाब सरकार ने IAS परमपाल कौर के चुनाव लड़ने पर क्यों उठाया सवाल? जानें क्या है सरकारी कर्मचारियों के लिए नियम?

IAS Parmapal Kaur: पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने बीजेपी की बठिंडा लोकसभा सीट की प्रत्याशी परमपाल कौर पर झूठ बोलकर वीआरएस लेने का आरोप लगाया है।
IAS Parmapal Kaur
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पंजाब सरकार ने भाजपा की बठिंडा लोकसभा सीट से प्रत्याशी परमपाल कौर सिद्धू को तुरंत ड्यूटी में लौटने का नोटिस भेजा है। दरअसल परमपाल कौर एक आईएएस अफसर भी हैं। उन्होंने हाल में ही वीआरएस ले लिया था। जिसके बाद वह बीजेपी में शामिल हो गई और बीजेपी ने उन्हें बठिंडा लोकसभा सीट से प्रत्याशी बना दिया। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने बीजेपी की बठिंडा लोकसभा सीट की प्रत्याशी परमपाल कौर पर झूठ बोलकर वीआरएस लेने का आरोप लगाया है। पंजाब सरकार ने उन्हें तुरंत ड्यूटी में आने का नोटिस भेजा है और कहा है कि उनका तीन महीने का नोटिस पीरियड को माफ नहीं किया गया है।

आपके तीन महीने के नोटिस पीरियड को अभी तक माफ नहीं किया गया है

अकाली दल के नेता सिकंदर सिंह मलूका परमपाल कौर के ससुर हैं। पंजाब सरकार का कहना है कि परमपाल कौर ने अपनी वीआरएस की एप्लीकेशन में वीआरएस का कारण अपनी 81 साल की मां के स्वास्थ्य का ध्यान रखने को बताया था। जिसमे उन्होंने कहा था कि उनकी माता का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। उनके छोटे भाई और पिता का काफी पहले निधन हो गया था। उनकी माता का भारत में ध्यान रखने के लिए कोई नहीं है। परमपाल कौर ने कहा था कि वह अपने बठिंडा के घर में अपनी माता का ध्यान रखेंगी। पंजाब सरकार ने परमपाल कौर को भेजे नोटिस में कहा है कि आपने वीआरएस एप्लीकेशन में झूठे कारण बताये थे। आप तो राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो। पंजाब की आम आदमी सरकार ने लिखा है कि आपके तीन महीने के नोटिस पीरियड को अभी तक माफ नहीं किया गया है।

नोटिस का पालन नहीं करती हैं तो उनपर कार्रवाई करने की बात कही है

पंजाब सरकार ने परमपाल कौर को भेजे नोटिस में नियम16(2) का हवाला देते हुए कहा है कि अभी तक आपके तीन महीने के नोटिस पीरियड को माफ नहीं किया गया है। राज्य सरकार ने वीआरएस के लिए अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया है। राज्य सरकार ने पंजाब में आईएएस की कमी का हवाला देते हुए कहा है की यहां(पंजाब) 231 आईएएस पदों की आवश्यकता है, लेकिन 192 आईएएस ही हैं। पंजाब की आप सरकार ने परमपाल कौर को जल्द ड्यूटी में आने को कहा है। अगर वह इस नोटिस का पालन नहीं करती हैं तो उनपर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।

फिर चाहे वो आईएएस या आईपीएस ही क्यों न हो

सेंट्रल सिविल सर्विसेस (कंडक्ट) रूल्स, 1964 के अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी और अफसर को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं है। न ही वह चुनाव लड़ सकता है। फिर चाहे वो आईएएस या आईपीएस ही क्यों न हो। सभी सरकारी अफसरों को इस नियम को मानना होगा। साथ ही सरकारी कर्मचारी और अफसर अपने परिवार के सदस्यों को भी किसी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं होने देगा। अगर उनका परिवार का सदस्य इसके बावजूद भी किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होता है तो इसकी सूचना सरकार को देनी होगी।

इसी तरह के नियम राज्य सरकार के कर्मचारियों और अफसरों के लिए है। अगर किसी सरकारी कर्मचारी की किसी राजनीतिक रैली में ड्यूटी भी लग जाती है, तब भी उसे न तो नारेबाजी करने की अनुमति होगी, न ही पार्टी का झंडा उठाने की अनुमति होगी और सबसे बड़ी बात उसे पार्टी का प्रचार करने की भी अनुमति नहीं होगी।

क्या है सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए चुनाव लड़ने के नियम

कोई भी सरकारी व्यक्ति पद पर रहते हुए, न तो चुनाव लड़ सकता है और न ही किसी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो सकता है। अगर सरकारी अधिकारी या सरकारी अफसर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है या वह रिटायर हो गया है तो उसे चुनाव लड़ने से कोई नहीं रोक सकता है। उन्हें भी चुनाव लड़ने का अधिकार है। यह बात अलग है कि कभी कभी कोर्ट भी स्पेशल केस में सरकारी व्यक्ति को पद में रहते हुए चुनाव लड़ने की अनुमति दे देता है। इसका जीता जागता उदाहरण दीपक घोघरा हैं जो एक सरकारी डॉक्टर हैं, उनको राजस्थान हाईकोर्ट ने विधानसभा का चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी थी। उनको हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर आप चुनाव हार जाते हैं तो आप दोबारा से अपनी सरकारी डॉक्टर की नौकरी ज्वाइन कर सकते हैं। यह बात अलग है कि दीपक घोघरा विधानसभा का चुनाव हार गए थे।

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