कोई अपने बच्चे का नाम राहुल गांधी या लालू प्रसाद यादव रखे तो क्या उसे चुनाव न लड़ने देंः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- कोई माता-पिता अपने बच्चे का नाम राहुल गांधी रख दे तो उसे चुनाव लड़ने से थोड़ी रोकेंगे?
Rahul Gandhi Lalu Prasad Yadav
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। 2014 के लोकसभा चुनाव थे। छत्तीसगढ़ की महासमुंद सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार थे अजीत जोगी। बीजेपी के उम्मीदवार थे चंदूलाल साहू। अपनी गुणा-गणित के लिए मशहूर अजीत जोगी ने महासमुंद से 10 और चंदू चुनाव में खड़े कर दिए। चंदू लाल, चंदू राम, चंदू कुमार। उनका गणित कुछ ऐसे बैठा था कि भोले-भाले ग्रामीण वोटर नाम के फेर में पड़कर कहीं बीजेपी के चंदूलाल की जगह किसी और को वोट देंगे, इससे बीजेपी का वोट कटेगा और फायदा जोगी को होगा। पर ऐसा हुआ नहीं, 2014 के चुनाव में बीजेपी चंदूलाल साहू जीत गए।

वोटरों को भ्रम में डालने वाली प्रैक्टिस

एक उम्मीदवार के नाम वाले कई उम्मीदवार खड़ा करने की प्रैक्टिस भारतीय चुनावों में नई नहीं है। पर ये प्रैक्टिस कन्फ्यूज़न ज़रूर पैदा करती है। ऐसे स्थिति को रोकने के लिए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में डाली गई थी। साबू स्टीफेन नाम के शख्स ने अपनी याचिका में कहा था कि वोटरों को भ्रम में डालकर चुनाव को प्रभावित करने के लिए हमनाम उम्मीदवार उतारे जाते हैं, ये प्रैक्टिस बंद होनी चाहिए। उन्होंने ये मांग भी कर दी कि अदालत चुनाव आयोग को निर्देश दे कि ऐसे मामलों की सख्त जांच हो।

उनका तर्क था कि इस तरह के कई मामलों में देखा गया है कि वैलिड उम्मीदवार का वोट डमी उम्मीदवारों को मिल जाता है, जिससे जीत का अंतर बढ़ जाता है।

किसी को चुनाव लड़ने से थोड़ी रोकेंगेः SC

पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने इस याचिका को ही खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "अगर कोई अपने बच्चे का नाम राहुल गांधी या लालू प्रसाद यादव रख दे तो उस नाम वाले शख्स को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता है।" उन्होंने साफ किया कि न तो माता-पिता को अपने बच्चों का नाम अपनी मर्जी से रखने से रोका जा सकता है और न ही किसी योग्य नागरिक को नाम के आधार पर चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद साबू स्टीफेन ने अपनी याचिका वापस ले ली।

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