Chunavi Kissa: जब 1 वोट से अटल बिहारी की गिरी सरकार, संसद में छलके आंसू, नेताओं से पूछो 1 वोट की ताकत

New Delhi: देश में चुनावी माहौल हैं ऐसे में हर नेता जनता से वोट की अपील कर रहे हैं। लोकतंत्र में 1-1 वोट की कीमत खून की कीमत से भी अधिक है।
Atal Bihari Vajpayee
Chunavi Kissa
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। वोट देना हमारे देश में रह रहे 18 साल के ऊपर के सभी नागरिकों का अधिकार है। 1-1 वोट की कीमत क्या होती है इसको नेताओं से ज्यादा अच्छे से कोई नहीं जानता। देश में लोकसभा चुनाव का माहौल है यहां सीटें कुल 543 हैं। जनता के लिए वोट एक ऐसा हथियार है जिससे वो किसी उम्मीदवार को राजा से भिखारी और भिखारी से राजा बना सकता है।

जब संसद के पट पर अटल बिहारी के छलके आंसू

बात है साल 1999 की देश में उस समय जम्मू-कश्मीर के कारगिल में पाकिस्तान के साथ युद्ध बस खत्म ही हुई थी। अटल बिहारी वाजपेयी उस समय देश के प्रधानमंत्री थे। भारत ने पाकिस्तान से जीत हासिल की। उसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन में युद्ध छिड़ गया। मामला संसद तक पहुंच गया। उसके बाद संसद में फ्लोर टेस्ट को मंजूरी मिली। अटल बिहारी को पूरा विश्वास था कि उनकी सरकार बच जाएगी। लेकिन इसके बाद जो हुआ उससे अटल बिहारी का दिल टूट गया। दरअसल, हुआ यूं कि संसद में फ्लोर टेस्ट जब वोटिंग हुई तो सरकार के पक्ष में 269 वोट पड़े और विरोध में 270 वोट पड़े। अटल बिहारी की 13 महीनें की सरकार 1 वोट से गिर गई। उन्हें इस बात का इतना दुख हुआ कि वे अपने आंसू नहीं रोक पाए। संसद के पट पर उनके आंसू छलक उठें। उनके आंसूओं से बीजेपी में सन्नाटा छा गया।

कर्नाटक में भी हो चुका है 1 वोट की कीमत का खेला

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी नेता को 1 वोट से सत्ता की कुर्सी गवानी पड़ी ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है। यह समस्या साल 2004 में जेडीएस नेता एआर कृष्णमूर्ति के साथ हुई थी। उस समय हुए सांथेमरहल्ली विधानसभा सीट पर वह कांग्रेस के आर ध्रुव नारायण से महज 1 वोट से हार गए थे। इस चुनाव में कृष्णमूर्ति को 40,751 वोट मिले थे। वहीं 40,752 वोट पाकर ध्रुवनारायण विजयी हुए थे।

जब सीपी जोशी को गंवानी पड़ी थी सीएम की कुर्सी

बात साल 2008 की है राजस्थान में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। नाथद्वारा विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी मैदान में थे। उन्हें टक्कर देने के लिए बीजेपी के कल्याण सिंह चौहान चुनाव लड़ रहे थे। इस चुनाव में कल्याण सिंह चौहान को कुल 62,216 वोट मिले थे, वहीं सीपी जोशी को 62,215 वोट मिले और वह एक वोट से हार गए थे। इस हार से सीपी जोशी का मुख्यमंत्री बनने का सपना टूट गया था।

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