नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। प्रदेश में ठंड बढ़ने के साथ ही वायु प्रदूषण भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राजधानी समेत कई जिलों में लोग छींक, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत और कब्ज जैसी समस्याओं से परेशान हैं। खासतौर पर जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या जिन्हें अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन संबंधी बीमारियां पहले से हैं, उनके लिए यह मौसम ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन गया है। ऐसे में आयुर्वेदिक उपाय ठंड और प्रदूषण दोनों से बचाव का प्रभावी और किफायती विकल्प साबित हो सकते हैं।
सही दिनचर्या से मिलेगा ठंड और प्रदूषण से बचाव
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के रोग एवं विकृति विभाग के डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि यदि सर्दियों में ऋतु के अनुसार भोजन और दिनचर्या अपनाई जाए, तो ठंड और प्रदूषण के दुष्प्रभाव काफी हद तक कम किए जा सकते हैं। रोजाना सरसों के तेल से सिर से पांव तक हल्की मालिश शरीर में गर्माहट बनाए रखती है। सुबह नाक में अणु तेल या सरसों तेल की 1–2 बूंद डालना फेफड़ों को प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचाता है।
तेल मालिश, सूर्यस्नान और योग के फायदे
सुबह आधा घंटा धूप में बैठकर सूर्यस्नान करने से शरीर में प्राकृतिक ऊर्जा बढ़ती है और इम्यूनिटी मजबूत होती है। विशेषज्ञ की सलाह से अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी जैसे प्राणायाम श्वसन तंत्र को सशक्त बनाते हैं। रात को भाप लेने से नाक और फेफड़ों की सफाई होती है, जिससे सर्दी-जुकाम में राहत मिलती है।
सर्दी में सही भोजन बनेगा सेहत की ढाल
आयुर्वेद में हेमंत और शिशिर ऋतु में उष्ण, तरल और स्नेही आहार को लाभकारी बताया गया है। बाल रोग विभाग के डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया के अनुसार बच्चों को रोज हल्दी वाला दूध देना चाहिए। आंवला इस मौसम में आसानी से मिलता है, जो विटामिन-सी और आयरन का बेहतरीन स्रोत है। गुड़, अदरक, कच्ची हल्दी, तिल और सोंठ से बने व्यंजन शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं।
पाचन तंत्र मजबूत रहेगा तो दूर रहेंगे रोग
प्रभारी अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार सिंह बताते हैं कि ठंड में पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है, जिससे कब्ज और गैस की समस्या बढ़ती है। दिनभर गुनगुना पानी पीना, रात को दूध में एक चम्मच घी लेना और भिगोया हुआ मेथी दाना खाना पाचन को दुरुस्त रखता है। नियमित योग, संतुलित आहार और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर सर्दियों और प्रदूषण के संयुक्त असर से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।





