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Friday, March 13, 2026
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स्पोंडिलोसिस – Spondylosis in Hindi.

स्पोंडिलोसिस या स्पॉन्डिलाइटिस, आर्थराइटिस का ही एक रूप है। यह समस्या मुख्यत: मेरु दंड (Spine) को प्रभावित करती है।

स्पोंडिलोसिस मेरुदंड की हड्डियों की असामान्य बढ़ोत्तरी और वर्टेब (Vertebrates) के बीच के कुशन (इंटरवर्टेबल डिस्क) में कैल्शियम के डी-जेनरेशन, बहिःक्षेपण और अपने स्थान से सरकने की वजह से होता है।

स्पॉन्डिलाइटिस के प्रकार – Types of Spondylosis in Hindi

शरीर के विभिन्न भागों को प्रभावित करने के आधार पर स्पॉन्डिलाइटिस तीन प्रकार का होता है: 

सरवाइकल स्पोंडिलोसिस (Cervical Spondylosis): गर्दन में दर्द, जो सरवाइकल को प्रभावित करता है, सरवाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कहलाता है। यह दर्द गर्दन के निचले हिस्से, दोनों कंधों, कॉलर बोन और कंधों के जोड़ तक पहुंच जाता है। इससे गर्दन घुमाने में परेशानी होती है और कमजोर मांसपेशियों के कारण बांहों को हिलाना भी मुश्किल होता है।

1. लम्बर स्पोंडिलोसिस (Lumbar Spondylosis): इसमें स्पाइन के कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है।

2. एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस (Ankylosing Spondylosis): यह बीमारी जोड़ों को विशेष रूप से प्रभावित करती है। रीढ़ की हड्डी के अलावा कंधों और कूल्हों के जोड़ इससे प्रभावित होते हैं। एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस होने पर स्पाइन, घुटने, एड़ियां, कूल्हे, कंधे, गर्दन और जबड़े कड़े हो जाते हैं।

स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या – Facts of Spondylosis

आमतौर पर इसके शिकार 40 की उम्र पार कर चुके पुरुष और महिलाएं होती हैं। आज की जीवनशैली में बदलाव के कारण युवावस्था में ही लोग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण गलत पॉश्चर है, जिससे मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा शरीर में कैल्शियम की कमी दूसरा महत्वपूर्ण कारण है।

मैक्स हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक विभाग के अनुसार, हॉस्पिटल में हर सप्ताह स्पॉन्डिलाइटिस के 20 नये मामले आते हैं, जिनमें मरीज की उम्र 30 से कम होती है। एक दशक पहले के आंकड़ों से तुलना करें तो यह संख्या तीन गुनी हुई है। वे युवा ज्यादा परेशान मिलते हैं, जो आईटी इंडस्ट्री या बीपीओ में काम करते हैं या जो लोग कम्प्यूटर के सामने अधिक समय बिताते हैं।

एक अनुमान के अनुसार हमारे देश का हर सातवाँ व्यक्ति गर्दन और पीठ दर्द या जोड़ों के दर्द से परेशान है।

स्पोंडिलोसिस के लक्षण – Spondylosis Symptoms in Hindi

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  • अगर स्पाइनल कोर्ड दब गई है तो ब्लेडर (Bladder) या बाउल (Bowl) पर नियंत्रण खत्म हो सकता है।
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  • इस रोग का दर्द हाथ की उंगलियों से सिर तक हो सकता है।
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  • उंगलियां सुन्न हो जाती हैं।
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  • कंधे, कमर के निचले हिस्से और पैरों के ऊपरी हिस्से में कमजोरी और कड़ापन आ जाता है।
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  • कभी-कभी छाती में दर्द हो सकता है।
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  • कशेरुकाओं (Vertebra) के बीच की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है।
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  • गर्दन से कंधों और वहां से होता हुआ यह दर्द हाथों, सिर के निचले हिस्से और पीठ के ऊपरी हिस्से तक पहुंच सकता है।
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  • छींकना, खांसना और गर्दन की दूसरी गतिविधियां इन लक्षणों को और गंभीर बना सकती हैं।
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  • दर्द के अलावा संवेदन शून्यता और कमजोरी महसूस हो सकती है।
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  • शारीरिक संतुलन गड़बड़ा सकता है।
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  • सबसे पहले दिखाई देने वाले लक्षणों में से एक गर्दन या पीठ में दर्द और उनका कड़ा हो जाना है।
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  • समय बीतने के साथ दर्द का गंभीर हो जाना।
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  • स्पोंडिलोसिस की समस्या होने पर यह सिर्फ जोड़ो तक ही सीमित नहीं रहती। समस्या गंभीर होने पर बुखार, थकान, उल्टी होना, चक्कर आना और भूख की कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
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स्पोंडिलोसिस के कारण – Spondylosis Causes in Hindi

स्पोंडिलोसिस कई कारणों से होता है। कई बार जोड़ों में दर्द का कारण बनने वाले स्पोंडिलोसिस आनुवांशिक भी होती है लेकिन अधिकतर मामलों में ऐसा नहीं होता। स्पोंडिलोसिस के कुछ सामान्य कारण निम्न हैं:

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  • आनुवंशिक कारण
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  • उम्र का बढ़ना
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  • भोजन में पोषक तत्वों, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी के कारण हड्डियों का कमजोर हो जाना
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  • बैठने या खड़े रहने का गलत तरीका
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  • लंबे समय तक ड्राइविंग करना
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  • शारीरिक श्रम का अभाव
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  • मसालेदार ठंडी या बासी चीजों को खाना
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  • विलासिता पूर्ण जीवनशैली
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  • महिलाओं में लगातार माहवारी का असंतुलन
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  • उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों में क्षय या विकार पैदा होना
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  • अक्सर फ्रैक्चर के बाद भी हड्डियों में क्षय की स्थिति होने लगती है।
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स्पोंडिलोसिस का उपचार – Spondylosis Treatment in Hindi

खाने में कैल्शियम और विटामीन डी को शामिल कर काफी हद तक इस बीमारी से बचा जा सकता है। लेकिन इसके साथ ही स्पोंडिलोसिस से बचने के  लिए अपने चलने और बैठने के तरीके पर भी ध्यान देना जरूरी है। कुछ अन्य सावधानियां और उपाय निम्न हैं: 

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  • जीवनशैली में बदलाव लाएं।
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  • पौष्टिक भोजन खाएं, विशेषकर ऐसा भोजन जो कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर हो।
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  • चाय और कैफीन का सेवन कम करें।
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  • पैदल चलने की कोशिश करें। इससे बोन मास (Bone Mass) बढ़ता है। शारीरिक रूप से सक्रिय (Active) रहें।
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  • नियमित रूप से व्यायाम और योग करें।
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  • हमेशा आरामदायक बिस्तर पर सोएं। इस बात का ध्यान रखें कि बिस्तर न तो बहुत सख्त हो और न ही बहुत नर्म।
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  • स्पोंडिलोसिस से पीड़ित लोग गर्दन के नीचे बड़ा तकिया न रखें। उन्हें पैरों के नीचे भी तकिया नहीं रखना चाहिए।
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  • ऐसी मेज और कुर्सी का प्रयोग करें, जिन पर आपको झुक कर न बैठना पड़े। हमेशा कमर सीधी करके बैठें। 
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  • धूम्रपान न करें और तंबाकू न चबाएं।
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