दर्द या पीड़ा के बारे में – About Pain in Hindi
स्नायु तंत्र में वह सामान्य संवेदना (Sensation) है जिसकी शुरूआत आपको किसी भी संभावित चोट तथा अपनी देखभाल के प्रति सतर्क करने के लिये होती है।
दर्द के प्रकार – Types of Pain in Hindi
दर्द को कई तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है, दर्द के कारणों के अनुसार या लक्षणों के अनुसार। दर्द (dard) का मौलिक वर्गीकरण दर्द की अवधि के अनुसार होता है। दर्द के कुछ अहम वर्ग निम्न हैं:
1. अल्पकालिक और भयंकर दर्द – Acute Pain in Hindi
आमतौर पर एक्यूट पेन (Acute Pain) अचानक बीमारी, जलने, या मांसपेशी के चोटिल होने से होता है। भयंकर दर्द के कारण का निदान एवं उपचार (Diagnosis and Treatment) प्राय: कर लिया जाता है और दर्द किसी समयावधि या भीषणता में सीमित (Limited) होता है। एक्यूट पेन सुरक्षात्मक होता है और रोग समाप्त होने के बाद इससे पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है,
एक्यूट पेन के बारे में – Facts of Acute Pain in Hindi
- _x000D_
- इसकी अवधि कम होती है।
- इसके रोग की पहचान एवं पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
- इसके उपचार (Treatment) के लिए प्रायः दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) का उपयोग किया जाता है।
- सामान्यतः इलाज के बाद दर्द ठीक हो जाता है।
_x000D_
_x000D_
_x000D_
_x000D_
2. दीर्घकालिक दर्द – About Chronic Pain in Hindi
दीर्घकालिक दर्द या क्रॉनिक पेन कभी समाप्त नहीं होता है- यह भयंकर दर्द की तुलना में लंबे समय तक रहता है और अधिकतर चिकित्सा उपचारों के प्रतिरोधी क्षमता (Resistant) वाला होता है। क्रॉनिक पेन के संकेत सप्ताहों, महीनों और वर्षों तक संकेत देते रहते हैं। क्रॉनिक पेन प्रायः रोग समाप्त होने के बाद भी नहीं जाता और इसके सामान्यतः कोई लाभ नहीं हैं। इसके अतिरिक्त क्रॉनिक पेन किसी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता (Quality of life) को काफी हद तक प्रभावित करता है।
क्रॉनिक पेन के बारे में – Facts of Chronic Pain in Hindi
- _x000D_
- दीर्घकालिक दर्द या क्रॉनिक पेन लगातार रह सकता है या बार-बार हो सकता है। (महीनों या सालों तक रह सकता है)।
- यह प्रायः किसी दीर्घकालिक बीमारी के कारण होता है और उस रोग के लक्षणों में एक हो सकता है।
- इसके पूर्वानुमान नहीं लगाए जा सकते और प्रायः रोग की पहचान सुनिश्चित नहीं होती।
- इलाज में सामान्यतः कई विधियां सम्मिलित रूप से प्रयोग में लाई जाती हैं।
- प्रायः रोग ठीक हो जाने या इलाज पूरा हो जाने के बाद दुबारा दर्द हो सकता है।
_x000D_
_x000D_
_x000D_
_x000D_
_x000D_
क्रॉनिक पेन के उदाहरण :
- _x000D_
- कमर के निचले हिस्से में दर्द
- आर्थ्राइटिस (गठिया) का दर्द
- फाइब्रोमायल्जिया
- माइग्रेन
_x000D_
_x000D_
_x000D_
_x000D_
दर्द के कारण – Pain Causes in Hindi
दर्द के कई कारण होते हैं जैसे चोट लगना, पूरानी बीमारी आदि। दर्द (dard) के कुछ विशेष कारण निम्न हैं:
- _x000D_
- कैंसर
- कान में संक्रमण
- अचानक बीमारी
- मांसपेशी की चोट
- जलना
- पुराना दर्द पूर्व की किसी चोट या शारीरिक नुकसान में भी होता है
_x000D_
_x000D_
_x000D_
_x000D_
_x000D_
_x000D_
दर्द का इलाज – Pain Treatment in Hindi
दर्द होने पर सबसे आसान उपाय लोग दर्द निवारक लेना समझते हैं। कई बार दर्द निवारक भी पूर्ण रूप से दर्द खत्म नहीं कर पाता। दर्द की स्थिति में कुछ निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं। दर्द के निदान एवं उपचार (Diagnosis and Treatment) का उद्देश्य रोगी की कार्यप्रणाली में सुधार करना है जिससे वे अपने दैनिक काम कर सकें।
- _x000D_
- चोट या जोड़ों के दर्द में राहत के लिए ठंडा या गर्म सेंक करना आसान उपाय माना जाता है।
- ठंडा सेंक – बर्फ हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती है। जिससे हमें दर्द व जलन से हमें छुटकारा मिलने के साथ ही चोट ठीक हो जाती है। ठंडा सेंक केवल ताजा चोट के समय ही करना चाहिए। यदि चोट लगे 6-7 घंटे हो चुके हैं तो ठंडे सेंक से बचना चाहिए। लील पड़ने से रोकने व जोड़ों में खून को इकट्ठा होने से रोकने के लिए ठंडा सेंक किया जाता है।
- गर्म सेंक – गर्मी से नसों में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है जिससे अकड़ी हुई मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं और दर्द में आराम मिलता है।
- गर्म पानी का सेंक बहुत अधिक सर्दी के मौसम में करना फायदेमंद होता है। गर्मी के मौसम में गर्म सेंक नहीं करना चाहिए। सर्दी के मौसम में जोड़ों पर स्थित नसें सिकुड़ने लगती हैं। ऐसे में गर्म पानी के सेंक से दर्द पैदा करने वाले ऊत्तक और नसें खुल जाती हैं।
- गंभीर चोटों में गर्म सेंक न लें। यह चोट में हो रही जलन को और बढ़ा सकता है। ऐसे में उस चोट को ठीक होने में ज्यादा समय भी लग सकता है
_x000D_
_x000D_
_x000D_
_x000D_
_x000D_




