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Friday, March 20, 2026
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कुष्ठ रोग – Leprosy in Hindi

कुष्ठरोग (Leprosy) माइकोबैक्टेरियम लेप्री (Mycobacterium Leprae) और माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस (Mycobacterium Lepromatosis) जीवाणुओं के कारण होने वाली एक दीर्घकालिक बीमारी (Chronic Disease) है। यह मुख्य रूप से मानव त्वचा (Skin), ऊपरी श्वसन पथ की श्लेष्मिका (Mucous Membrane of Upper respiratory Track) , परिधीय तंत्रिकाओं (Peripheral Nerves), आंखों और शरीर के कुछ अन्य क्षेत्रों को प्रभावित करती है। यदि कुष्ठरोग (Kushth Rog) का उचित समय पर उपचार न किया जाये तो यह रोग बढ़ सकता है, जिससे त्वचा, नसों, हाथ-पैरों और आंखों में स्थायी क्षति हो सकती है। 

कुष्ठरोग के प्रकार – Types of Leprosy in Hindi

कुष्ठरोग सामान्यतः तीन प्रकार का होता है, जो निम्न हैं: 

1. तंत्रिका कुष्ठ (Nerve leprosy) – इसमें शरीर के प्रभावित अंगो की संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है। उस स्थान पर सुई चुभने पर भी मनुष्य किसी प्रकार का कोई दर्द महसूस नहीं करता।

2. ग्रंथि कुष्ठ (Lapromatus leprosy) – इसमें शरीर के किसी भी भाग में त्वचा से भिन्न रंग के धब्बे या चकत्ते पड़ जाते हैं अथवा शरीर में गांठें निकल आती है।

3. मिश्रित कुष्ठ – इसमें शरीर के प्रभावित अंगों की संवेदनशीलता समाप्त होने के साथ-साथ त्वचा में चकत्ते भी पड़ते हैं और गांठें भी निकलती हैं।

कुष्ठरोग रोग न तो वंशानुगत होता है न हीं यौन-संपर्क के द्वारा फैलता है। वयस्कों की अपेक्षा बच्चों में इस रोग के होने का खतरा अधिक होता है। अतः: जो बच्चे कुष्ठ रोगियों के संपर्क में रहते हैं, उनको इस रोग से बचाव के लिए अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है।

केवल ऐसे संक्रमित कुष्ठ रोगी जिनका बहुत दिनों से उपचार न हुआ हो के संपर्क में आने से कुष्ठ फैल सकता है। इससे पीड़ित लोग भी उपचार के मात्र 2 सप्ताह बाद ही संक्रामक नहीं रह जाते।यदि कुष्ठ रोग अति संक्रामक स्थिति में है, तो परिचारक (Attendant), कुष्ठ रोग की दवाओं का सेवन करके रोग मुक्त रह सकता है। 

कुष्ठरोग एक वैश्विक समस्या – Leprosy in World in Hindi

1995 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन) (डब्ल्यूएचओ) (WHO) के अनुमान के अनुसार कुष्ठरोग के कारण स्थायी रूप से विकलांग हो चुके व्यक्तियों की संख्या 2 से 3 मिलियन के बीच थी। पिछले 20 वर्षों में, पूरे विश्व में 15 मिलियन लोगों को कुष्ठरोग से मुक्त किया जा चुका है। कुष्ठरोग और इसके पीड़ितों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिये विश्व कुष्ठरोग दिवस (वर्ल्ड लेप्रसी डे) की स्थापना की गई।

कुष्ठ रोग के संबंध में गलत तथ्य – Myths About Leprosy in Hindi

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  • कुछ लोगों का विश्वास है कि वंशानुगत कारणों, अनैतिक आचरण, अशुद्ध रक्त, खान-पान की गलत आदतें जैसे सूखी मछली खाने, पूर्वपापकर्म आदि कारणों से कुष्ठ रोग होता है।
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  • लोग मानते हैं कि कुष्ठ रोग केवल कुछ ही परिवारों में फैलता है। यह केवल स्पर्शमात्र से हो जाता है।
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  • कुष्ठ रोग प्राय: कुरूपता के साथ जुड़ा हुआ होता है। कुरूपता आने के बाद ही कुष्ठ रोग का निदान किया जा सकता है।
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  • कुष्ठ रोग अत्यंत संक्रमणशील है एवं यह संक्रमणशीलता कुरूपता से जुड़ी हुई है।
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  • कुष्ठ रोग लाइलाज है।
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  • जिन परिवारों में कुष्ठ रोगी हैं, उस परिवार के बच्चों को कुष्ठ रोग होगा ही।
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कुष्ठरोग के लक्षण – Kusthrog ke Lakshan in Hindi

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  • चेहरे पर, नितंबों पर, शरीर के अन्‍य हिस्‍सों की दूसरी ओर बहुत सारे, नरम एवं जिनकी परिभाषा न बताई जाए ऐसे लाल व स्‍पर्शक्षम या स्‍पर्शहीन धब्‍बे हो जाना।
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  • त्‍वचा के रंग तथा गठन में परिवर्तन दिखाई देना ।
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  • त्‍वचा पर एक रंगहीन दाग जो थोड़ा या पूरी तरह स्‍पर्शहीन हो या उस दाग पर किसी चुभन का अनुभव नहीं होना।
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  • समान्यत त्‍वचा पर पाये जाने वाले पीले या ताम्र रंग के धब्‍बे जो सुन्‍न हों या
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  • हाथ और पैरों का सुन्‍न हो जाना।
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कुष्ठरोग के कारण – Kusthrog ke Karan in Hindi

माइकोबैक्टेरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) और माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस (Mycobacterium lepromatosis) जीवाणु

कुष्ठरोग का इलाज – Kusthrog Treatment in Hindi

कुष्ठरोग का इलाज बेहद आसान और कई सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में किया जाता है। कुष्ठ रोग होने पर निम्न उपाय अपनाने चाहिए: 

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  • सरकारी अस्पताल द्वारा रिहाइशी इलाकों में मौजूद स्वास्थ केंद्रों में नि:शुल्क इलाज उपलब्ध है। 
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  • अगर शरीर पर एक से पांच धब्बे हो तो छह माह तक दवाई लेनी चाहिए। 
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  • 6 से 12 धब्बे हो तो 12 माह या इससे अधिक समत तक दवाई लेने से यह रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। 
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