नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आज के समय में नौकरी या पढ़ाई के लिए लोग बड़े शहरों की ओर रुख करते हैं, जहां उन्हें अक्सर किराए के मकान में रहना पड़ता है। ऐसे में मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद होना आम बात है। इन विवादों की सबसे बड़ी वजह दोनों पक्षों को अपने Legal Rights की सही जानकारी न होना है। इसलिए घर किराए पर लेने या देने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। आइए जानते हैं क्या हैं किरायेदारों और मकान मालिकों के कानूनी अधिकार।
क्या हैं किरायेदारों के Legal Rights
- किरायेदार जो भी मकान किराये पर ले रहा है उसे पूरा अधिकार है कि वह मकान मालिक से लिखित रेंट एग्रीमेंट का मांग करे। अगर मकान मालिक ऐसा करने से मना करता है तो किरायेदार कानूनी रास्ता अपनाकर शिकायत दर्ज करा सकता है।
- किरायेदार को बिना कारण और नोटिस दिए घर से बाहर नहीं निकाला जा सकता, बल्कि मकान मालिक को पहले से लिखित नोटिस देना ज़रूरी होता है।
- यह भी प्रावधान है कि अगर किरायेदार ने मकान या सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया है तो उन्हें उनकी सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करना जरूरी है।
- मकान मालिक बिना अनुमति के किराए के घर में प्रवेश नहीं कर सकता, यहां तक कि अपनी चाबी होने पर भी।
मकान मालिक के पास है ये अधिकार
- मकान मालिक को तय वक्त पर किराये वसूलने का अधिकार होता है
- किराया नहीं चुकाए जाने पर मकान मालिक कोर्ट जा सकते हैं
- मकान मालिक को एग्रीमेंट के मुताबिक हर 11 महीने में किराया बढ़ाने का अधिकार भी होता है
- मकान मालिक एक या दो महीने का नोटिस देकर मकान खाली करवा सकता है
कुल मिलाकर जब किरायेदार और मकान मालिक अपने-अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों से अवगत होंगे तो किराये पर घर लेना और देना दोनों ही सरल, स्पष्ट और विवाद मुक्त प्रक्रिया बन जाएगी।




