RJ Assembly: विधानसभा में महिला भागीदीरी में आई गिरावट, फिर भी लहराया जीत का परचम, युवा और अनुभव का दिखा संगम

Jaipur: राजस्थान विधानसभा में आम जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों में इस बार युवा और अनुभव दोनों का संगम देखने को मिलेगा। हर आयु वर्ग के जनप्रतिनिधियों को विधानसभा तक पहुंचाया है।
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जयपुर, हि.स.। राजस्थान विधानसभा में आम जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों में इस बार युवा और अनुभव दोनों का संगम देखने को मिला प्रदेश की जनता ने विधानसभा चुनाव में अपना मत देकर हर आयु वर्ग के जनप्रतिनिधियों को विधानसभा तक पहुंचाया है।

युवाओं की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं आया

विधानसभा चुनाव 2018 की तुलना में युवाओं की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं आया है। पिछली बार जहां 25 से 30 वर्ष आयु वर्ग के तीन विधायक चुने गए थे, वहीं इस बार विधानसभा में ये संख्या 4 दिखी।

हालांकि, 31 से 50 आयु वर्ग के 63 विधायक इस बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं जो राजनीति में युवा राजनेता के तौर पर ही माने जाते हैं। इस बार 25 से 30 आयु वर्ग के बीच के 4 विधायक विधानसभा की दहलीज पर पहुंचे हैं। वहीं 31 से 50 उम्र के बीच 63 विधायक विधानसभा में अपना जोर दिखाएंगे। जबकि, 116 विधायक 51 से 70 की उम्र सीमा के बीच के हैं जो इस बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। वहीं 71 वर्ष से ज्यादा के करीब 16 विधायक चुनकर आए हैं।

शिव विधानसभा सीट से जीतकर आए रविंद्र सिंह भाटी सबसे कम आयु के

इस बार सबसे कम्र उम्र के विधायक शिव सीट से 25 साल के रविंद्र सिंह भाटी चुनकर आए हैं। वहीं कोलायत सीट पर 27 साल के अंशुमान सिंह भाटी ने जीत का परचम लहराया है। आसपुर सीट से भी 30 साल के उमेश मीना विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। सबसे उम्रदराज विधायक किशनगढ़बास से 83 साल के दीपचंद खैरिया हैं जिनके तर्जुबे का लाभ युवा विधानसभा में ले सकेंगे। बूंदी से 83 साल के हरिमोहन शर्मा भी 20 सालों बाद विधानसभा में अपना दम दिखाएंगे। पांचवीं बार चुनाव जीतकर कोटा नॉर्थ से 80 साल के शांति धारीवाल भी विधानसभा में गरजेंगे। अजमेर नॉर्थ से बीजेपी के वासुदेव देवनानी 75 साल की उम्र में भी विधानसभा में अपना दम दिखाएंगे। सीकर से 75 साल के राजेंद्र पारीक ने भी विधानसभा में चुनाव जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

विधानसभा में इस बार महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम ही रहेगा

बीते दिनों नारी शक्ति वंदन कानून का राजनीतिक दलों ने एक सुर में स्वागत किया और सदन में पास भी हुआ। राजस्थान विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने टिकट वितरण में ये जज्बा नहीं दिखाया और अब विधानसभा में इस बार महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम ही रहेगा। सदन में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का आंकड़ा कुल सीटों का महज 10 फीसदी ही रहा। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार 20 महिला विधायक ही सदन में नजर आएंगी।

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