राजस्थान, रफ्तार डेस्क। राजस्थान में चुनाव आयोग ने आखिरकार गुरुवार शाम 6 बजे से चुनाव प्रचार पर रोक लगा दिया है। प्रदेश में किसी भी प्रकार के सार्वजनिक बैठक या जुलूस आदि सभी पर चुनाव आयोग की तरफ से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। राजनीतिक दलों के द्वारा गिनाए गए मुद्दों और छोटे छोटे दलों का चुनावी गणित, प्रदेश की राजनीति का समीकरण बदलने में कितने कारगर साबित हो सकतें है अब इसका फैसला 3 दिसंबर को होगा। हालांकि 25 नवंबर को राजस्थान विधानसभा चुनाव में लोगों के द्वारा मतदान होने जा रहा है। 3 दिसंबर को परिणाम से ही पता चलेगा कि किस दल के मुद्दे किस पर भारी पड़े और छोटे दलों ने सत्ता बनाने में किस दल को अपना समर्थन दिया। फिर भी हर किसी को मीडिया द्वारा एकत्रित की गयी महत्वपूर्ण खबर को पढ़ने की खूब जिज्ञासा होती है। जिससे उन्हें खबरों का अपडेट मिलता रहें।
क्या राजस्थान में बदलेगा रिवाज?
प्रदेश में 1993 से अब तक सत्ता का सुख कोई भी दल लगातार नहीं उठा सका है। यहां एक बार कांग्रेस तो एक बार बीजेपी सत्ता में काबिज होती रहीं है। वर्तमान में अशोक गहलोत की कांग्रेस की सरकार सत्ता में है, इस बार के चुनाव में बीजेपी को भी सत्ता में आने की उम्मीद नज़ार आ रहीं है। वहीं कांग्रेस को लग रहा कि राजस्थान इस बार अपना रिवाज बदल रहा है। हालांकि सभी दलों ने अपने ठोस मुद्दे जनता के सम्मुख रखे हैं, उन पर भी चर्चा होना जरुरी है।
पुरानी पेंशन का मुद्दा बना सकता किंग मेकर का रास्ता
कांग्रेस और बीजेपी ने गैस सिलेंडर और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को कम करने की घोषणा से जनता में काफी सुर्खियां बटोरी है। तो वहीं भाजपा ने प्रदेश में गैस सिलेंडर के दाम 450 करने का वादा कर डाला, वहीं कांग्रेस ने इसके दाम 400 रूपए करने का वादा कर दिया। इसी प्रकार राजस्थान कांग्रेस ने पुरानी पेंशन बहाल करके बीजेपी के लिए मुश्किल पैदा कर रहीं है। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने भी चुनाव से पहले पुरानी पेंशन योजना की समीक्षा के लिए समिति का गठन बनाने की घोषणा करके प्रदेश की जनता को लुभाने की कोशिश की है।
प्रदेश के बागी नेता और छोटे दल बिगाड़ सकते हैं राजनीतिक समीकरण
वहीं कांग्रेस और बीजेपी के बागी नेता, दोनों दलों का राजनीतिक समीकरण बिगाड़ सकते है। वर्ष 2018 के चुनाव में निर्दलीय विधायकों ने अशोक गहलोत को समर्थन करके सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं प्रदेश में चार छोटी पार्टियां भी चुनाव में सक्रीय हैं, जो इस बार भी सत्ता बनाने और बिगाड़ने में अपनी भूमिका निभा सके है। ये छोटे दल हैं बहुजन समाज पार्टी, आरएलपी, एएसपी और बीएपी आदि।
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