Kamal Nath: इंदिरा मानती थी बेटा, संजय के थे दोस्त, तिहाड़ से संसद तक कुछ ऐसी है कमलनाथ की राजनीतिक यात्रा!

Madhya Pradesh: इंदिरा गांधी से संजय गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक। छिंदवाड़ा के सिंह कमलनाथ क्या शामिल होने वाले हैं BJP में।
Kamal Nath Political Journey
Kamal Nath Political Journey Raftaar.in

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। जब बात मध्य प्रदेश की राजनीति की हो तो कमलनाथ का नाम सबसे पहले आता है। कमलनाथ का दोबारा मुख्यमंत्री बनने का सपना टूटता नजर आ रहा है, मगर ये हार उनके मन को नहीं तोड़ पाई। कमलनाथ और कांग्रेस पार्टी का बहुत पुराना साथ है। ये कबतक बरकरार रहेगा ये कमलनाथ ही जानते हैं।

इंदिरा गांधी से लेकर संजय, सोनिया और राहुल तक

कमलनाथ को कांग्रेस का करीबी माना जाता है, वे कांग्रेस के दिग्गज और काफी पुराने नेता है।वे कांग्रेस से पिछले 40-45 साल से जुड़े हैं, उन्होंने जब कांग्रेस पार्टी से ही राजनीति में कदम रखा तब से वह कांग्रेस के ही हो गए। इंदिरा गांधी के समय उन्होंने राजनीति शुरु की और अब उनके पोते राहुल गांधी तक उनका कद बरकरार है।

राजनीति में कैसे हुई कमलनाथ की एंट्री?

कमलनाथ और इंदिरा गांधी के बड़े बेटे संजय गांधी एक साथ उत्तराखंड के 'द दून स्कूल' में पढ़ते थे। वहां कमलनाथ और संजय गांधी की गहरी दोस्ती हो गई। कमलनाथ को राजनीति में लाने का सबसे बड़ा हाथ संजय गांधी का रहा। देश में 1975 में जब एमर्जेंसी लगी उसके बाद देश में विपक्ष की सरकार बनी उस वक्त संजय गांधी को जेल में बंद कर दिया गया। कमलनाथ से अपने दोस्त का दुख नहीं देखा गया, उन्होंने कोर्ट रुम में जज के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस आरोप में उनको भी संजय गांधी के साथ दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कर दिया, इस बात से इंदिरा गांधी प्रभावित हुईं। 1980 लोकसभा चुनाव में कमलनाथ को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से लोकसभा की सीट का चुनाव जीतने का मौका मिला। इंदिरा गांधी ने उस समय खुद छिंदवाड़ा आकर कमलनाथ के लिए प्रचार-प्रसार किया। इस दौरान इंदिरा गांधी ने कमलनाथ को अपना तीसरा बेटा कहा। तभी से कमलनाथ इंदिरा गांधी के बेटे से मशहुर हुए। छिंदवाड़ा की सीट कमलनाथ का गढ़ है उनके बेटे नकुलनाथ आज छिंदवाड़ा से सांसद हैं।

1984 सिख दंगों में कमलनाथ का आया नाम

1984 में जब इंदिरा गांधी को उनके ही बॉडीगार्ड ने गोली मारकर हत्या की तब दिल्ली में सिखों के खिलाफ कांग्रेसियों में नफरत पैदा हो गई। अनगिनत सिखों को मारा गया, इसमें कमलनाथ का नाम शामिल हुआ मगर उनका अपराध साबित नहीं हो पाया। इंदिरा गांधी का शव जब अंतिम संस्कार के लिए जा रहा था तब कमलनाथ ने उनको कंधा दिया था। उस समय उन्होंने अपने बेटे होने का फर्ज निभाया।

ऐसा रहा कमलनाथ का कार्यकाल

लोकसभा चुनाव 1984, 1989, 1991 में भी उन्होंने बंपर जीत हासिल की। जून 1991 में उन्हें केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय का राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। 1995-96 में टेक्सटाइल मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का कामकाज देखा। 1998 और 1999 के चुनाव में भी उन्होंने बाजी मारी। 2004 के आम चुनाव में जीतने के बाद उन्हें केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री बनाया गया। 2009 के चुनाव के बाद उन्हें केंद्र में फिर मंत्री बनाया गया। इस बार उन्हें रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे की जिम्मेदारी दी गई। 2011 में शहरी विकास मंत्री बनाए गए, जिसके साथ अक्तूबर 2012 में संसदीय कार्यमंत्रालय का कामकाज भी उन्हें सौंप दिया गया। साथ ही कई और अहम मंत्रालय संभाले। 2001 से 2004 तक कमलनाथ कांग्रेस के महासचिव भी रहे।

मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रह गई अधूरी

यूं तो कमलनाथ कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं मगर मध्य प्रदेश की जनता ने ज्यादातर कांग्रेस से ज्यादा BJP को मध्य प्रदेश में चाहा है। इसी का नतीजा था कि विधानसभा चुनाव 2023 में BJP ने मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक जीत हासिल की। 2018 में उन्होंने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की शपथ ली। कमलनाथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने ही थे कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के 22 विधायकों को लेकर पार्टी से अलग हो गए। इसके बाद कांग्रेस को मध्य प्रदेश से हाथ धोना पड़ा। ज्योतिरादित्य सिंधिया BJP में शामिल होकर शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाने में मदद की।

राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रह गई अधूरी

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस की बुरी हार मिलने के बाद दिल्ली आलाकमान सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कमलनाथ से दूरी बना ली है। हाल ही में दिल्ली में कमलनाथ ने सोनिया गांधी से मुलाकात की, इस दौरान उन्होंने राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की। मगर इस बार भी उनकी इच्छा अधूरी रह गई। उनकी जगह राज्यसभा का उम्मीदवार अशोक सिंह को बनाया। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के अकाउंट के बायो से कांग्रेस का नाम हटा दिया है। सूत्रों के अनुसार, नकुलनाथ जल्द ही BJP में शामिल हो सकते हैं।

कमलनाथ और नकुलनाथ की BJP में जानें की तैयारी?

मध्य प्रदेश में पिछले दिनों दिग्विजय सिंह का BJP में शामिल होने की अटकलें आ रही थी। इस बात से दिग्विजय सिंह ने खारिज की। उन्होंने कहा कि जो डर रहे हैं या बिक रहे हैं, वे जा रहे हैं। इस बीच अब कमलनाथ और नकुलनाथ की भी BJP में शामिल होने की अटकलें आ रही हैं। अब देखना यह है कि कमलनाथ और नकुलनाथ लोकसभा चुनाव से पहले क्या दांव चलते हैं।

कांग्रेस को मध्य प्रदेश से लग सकता है झटका?

कमलनाथ और नकुलनाथ अगर लोकसभा चुनाव से पहले अगर कांग्रेस का दामन छोड़कर BJP या किसी भी अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं तो इसका सबसे बड़ा झटका मध्य प्रदेश में कांग्रेस को लग सकता है। क्योंकि छिंदवाड़ा से कमलनाथ विधायक हैं और उनके बेटे नकुलनाथ भी छिंदवाड़ा से सांसद हैं। छिंदवाड़ा की सीट कमलनाथ परिवार का गढ़ है, ऐसे में कांग्रेस इस सीट को लोकसभा चुनाव में दूसकी पार्टियों के हाथ गवांना नहीं चाहेगी।

खबरों के लिए क्लिक करें:- www.raftaar.in

Related Stories

No stories found.