नई दिल्ली, रफ्तार न्यूजः योगी सरकार पेपर लीक मामलों पर सख्ती दिखा रही है, लेकिन कुछ विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण सरकार की कोशिशों को झटका लग रहा है। ताजा मामला रेलवे विभाग के प्रमोशन परीक्षा पेपर लीक का है, जिसमें CBI ने FIR दर्ज की है। CBI ने ये कार्रवाई रेलवे बोर्ड के विजिलेंस विभाग की शिकायत पर की है।
6 अगस्त 2021 को आयोजित हुआ था एग्जाम
आरोप है कि 6 अगस्त 2021 को आयोजित जनरल डिपार्टमेंटल कॉम्पिटेटिव एग्जाम के पेपर लीक हुए थे। लखनऊ CBI की एंटी करप्शन ब्रांच ने इस मामले में परीक्षा देने वाले और पेपर लीक करने वाले 11 रेलकर्मियों पर केस दर्ज किया है। ये मामला रेलवे की विजिलेंस जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुआ है।
4-4 लाख रुपये में हुआ था सौदा
इस मामले में सीबीआई ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 11 जगहों पर छापेमारी की, जिनमें प्रयागराज, नोएडा, अलीगढ़, मथुरा, चित्रकूट, जयपुर, भरतपुर, करौली, अलवर, और सवाई माधोपुर शामिल हैं। छापेमारी के दौरान CBI को महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि परीक्षा से एक दिन पहले गाजियाबाद के रेलवे स्टेशन के पास एक कमरे में उम्मीदवारों को प्रश्नों के उत्तर बताए गए थे, और उनसे 4-4 लाख रुपए वसूले गए थे।
CBI ने परीक्षा कराने वाली एजेंसी अपटेक लिमिटेड को भी बनाया आरोपी
CBI ने परीक्षा कराने वाली एजेंसी अपटेक लिमिटेड को भी आरोपी बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयागराज रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा 6 अगस्त 2021 को आयोजित डीजीसीई परीक्षा का पेपर लीक करके 50 से 60 उम्मीदवारों को पढ़ाया गया था। जिन लोगों पर Fir दर्ज हुई है, उनमें ट्रैक मेंटेनर राजस्थान भरतपुर के भूप सिंह, वेगराज, महावीर सिंह, औऱ प्रीतम सिंह, अलवर से जितेंद्र कुमार मीना, सवाई माधोपुर का प्रमोद कुमार मीना, टोंका से हंसराज मीना, अलीगढ़ का धर्म देव, करौली का प्रशांत कुमार मीना, जयपुर में उत्तर पश्चिम के मुख्य अभियंता कार्यालय का कार्यालय अधीक्षक मान सिंह के साथ और अन्य जगहों के कई रेलकर्मी शामिल हैं। नोएडा के एक पार्सल पोर्टर नाम मोहित भाटी का भी इस मामले में नाम आया है।
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