नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क । । माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजन का विशेष विधान है, इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत भी होती है। इस बार सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त 2 व 3 फरवरी को दोनों ही दिन है। आइए जानते हैं सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
मां सरस्वती ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान और शिल्प-कला की देवी हैं। इस दिन को श्री पंचमी और सरस्वती पूजन के नाम से भी जाना जाता है। वहीं बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त मानकर सभी शुभ कार्य के लिये उपयुक्त माना जाता है। नवीन कार्यों की शुरुआत के लिये यह दिन अतिउत्तम है।
वसंत पंचमी की तारीख को लेकर असमंजस
इस बार वसंत पंचमी की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति रही। दृग पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि आज 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट से शुरू हो चुकी है, जो अगले दिन यानी कल 3 फरवरी को 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच में रहती है उस दिन को सरस्वती पूजा के लिये उपयुक्त माना जाता है।
हिंदू कैलेंडर में सूर्योदय और दोपहर के मध्य के समय को पूर्वाह्न के नाम से जाना जाता है। इस वजह से 2 फरवरी रविवार को वसंत पंचमी मनाई जा रही है। हालांकि देश के कुछ हिस्सों में उदया तिथि के अनुसार त्योहार मनाया जाता है, ऐसे में उदया तिथि के अनुसार बसंत पंचमी 3 फरवरी सोमवार को मनाई जाएगी।
2 फरवरी को सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग दिवाकर के अनुसार वसंत पंचमी 2 फरवरी को है। इस दिन सरस्वती पूजा के शुभ मुहूर्त के अनुसार 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 15 मिनट से माघ शुक्ल पंचमी तिथि लग रही है और पंचमी तिथि 3 फरवरी को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर ही समाप्त होगी इसलिए इस पंचांग के अनुसार 2 फरवरी को सरस्वती पूजन है। ऐसे में 2 फरवरी को सरस्वती पूजा का मुहूर्त 9 बजकर 45 मिनट के बाद है जबकि पूजन का उत्तम मुहूर्त सुबह 11:45 से लेकर 12:30 बजे तक है।
3 फरवरी को सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
कुछ पंचांगों में सरस्वती पूजा का उल्लेख 3 फरवरी को भी किया गया है इसलिए आप दिवाकर पंचांग से अलग सरस्वती पूजा 3 फरवरी को कर रहे हैं, तो 3 फरवरी को सरस्वती पूजा का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से पहले का है। आपको 3 फरवरी की सुबह 11 बजकर 45 मिनट से पहले ही सरस्वती पूजा कर लेनी चाहिए।
जानिए सरस्वती पूजन विधि
प्रातः काल स्नान कर पूजा स्थल पर एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं, उस पर मां सरस्वती का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद कलश, भगवान गणेश और नवग्रह पूजन कर मां सरस्वती की पूजा करें। मिष्ठान का भोग लगाकर आरती करें।
पूजन-अर्चन के साथ विद्यारंभ संस्कार शुभ-वसंत पंचमी पर नामकरण संस्कार, अन्नप्राशन, कर्णवेधन, मुंडन, अक्षरारंभ आदि शुभ कार्य किए जाएंगे। इस दिन शुभ चौघड़िया में सरस्वती की आराधना शुभकारी रहेगी। मान्यता है कि बसंत पंचमी को संगीत की उत्पत्ति के कारण यह दिन संगीत व वाद्य यंत्र सीखने के लिए श्रेष्ठ तिथि के रूप में मानी जाती है।
वसंत पंचमी पर होगा महाकुंभ में अमृत स्नान-उदया तिथि में वसंत पंचमी का मान सोमवार को रहेगा। उदयातिथि में बसंत पंचमी पर स्नान-दान व पूजन शुभ रहेगा। महाकुंभ का अमृत स्नान 3 फरवरी को होगा। इस महाकुंभ का यह अंतिम अमृत स्नान होगा।





