नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। विजया एकादशी हिंदू पंचांग की एक महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। यह व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है और इसे विशेष रूप से जीत और सफलता दिलाने वाला माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
धार्मिक महत्व
विजया एकादशी केवल उपवास नहीं है, बल्कि यह आत्मबल, संकल्प और मानसिक दृढ़ता बढ़ाने का पर्व है। पुराणों के अनुसार, भगवान राम ने लंका विजय से पहले समुद्र तट पर इस एकादशी का व्रत किया था, जिसके बाद उन्हें सफलता मिली। तभी से यह एकादशी विजय और कठिन परिस्थितियों में सफलता का प्रतीक मानी जाती है।
विजया एकादशी 2026 – तिथि
विजया एकादशी 2026 का व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। द्रिक पंचांग के अनुसार तिथि 12 फरवरी 2026 दोपहर 12:22 बजे प्रारंभ होकर 13 फरवरी दोपहर 02:25 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा और शुभ मुहूर्त
विजया एकादशी पर पूजा करने के लिए दिन के कुछ खास मुहूर्त अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। सुबह का ब्रह्म मुहूर्त 05:18 से 06:10 बजे तक है, जो दिन की शुरुआत में पूजा करने के लिए उत्तम समय है। इसके बाद सुबह 09:08 से 10:54 तक का अमृत काल बेहद शुभ माना जाता है। दोपहर में 12:13 से 12:58 तक का अभिजित मुहूर्त पूजा के लिए उत्तम समय है, और दिन का सबसे खास समय विजय मुहूर्त दोपहर 02:27 से 03:11 बजे तक है, जिसे पारंपरिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
व्रत पारण और हरी वासर
व्रत पारण 14 फरवरी 2026 को सुबह 07:00 – 09:14 के बीच किया जाएगा। हरी वासर सुबह 08:20 तक समाप्त होगी।
व्रत पालन के नियम
इस दिन सात्विक आहार लें, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और क्रोध व नकारात्मक विचारों से दूर रहें। संयम और श्रद्धा के साथ किया गया यह व्रत अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।





