नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी का पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ माह की शुक्ल की पंचमी को मनाया जाता है। यह त्यौहार विद्यार्थियों और किसानों के लिए काफी खास होता है। इस बार बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी, बुधवार को मनाई जाएगी वहीं बसंत पंचमी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इस दिन कुछ शुभ योग बनने जा रहे हैं।
बसंत पंचमी तिथि और शुभ मुहूर्त
शास्त्र के के अनुसार बसंत पंचमी तिथि 13 फरवरी दोपहर 2:41 से शुरू हो रही है। इस बार इसमें 3 शुभ योग बनने जा रहे हैं।इस दिन रवि योग सुबह 10 बजकर 43 मिनट से लेकर 15 फरवरी को सुबह 7 बजे तक रहेगा। रेवती नक्षत्र 13 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से शुरू होगा और समापन 14 फरवरी को सुबह 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। अश्विनी नक्षत्र सुबह 10 बजकर 43 मिनट से शुरू होगा और समापन 15 फरवरी को सुबह 9 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में आप इस बीच कभी भी बसंत पंचमी मना सकते हैं और मां सरस्वती की विधिवत पूजा कर सकते हैं।
बसंत में पीले रंग का क्या महत्व है
शास्त्र में पीला रंग सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने के लिए लोग पीले वस्त्र पहनते हैं। पीले फूल चढ़ाते हैं। पीले फल भेंट करते हैं। इसके साथ ही पीले रंग का प्रसाद भी बनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि बसंत पंचमी आते-आते ठंडक कम हो जाती है। मौसम सुहाना हो जाता है। पेड़ पौधे में नई पत्तियां निकलने लगती हैं। खेतों में सरसों की फसल लहराने लगती हैं। साथ ही यह भी कहा जाता है की पीले रंग इस दिन पहनने से आत्मविश्वास बढ़ता है और तनाव दूर रहता है। और मां सरस्वती की कृपा बनी रहती है।
पूजा विधि
*बसंत पंचमी की पूजा करने के लिए प्रातः काल स्नान करके चौकी पर पीला वस्त्र बिछाए,
* इसके बाद मां सरस्वती का चित्र या उनकी प्रतिमा स्थापित करें।
* फिर कलश और भगवान गणेश और नवग्रह पूजन कर मां सरस्वती की पूजा करें।
* पूजा करने वाला व्यक्ति पीले रंग के ही कपड़े धारण करें,
* मां सरस्वती को पीले रंग के फूल चढ़ाए
* पीले रंग के वस्त्र पहने, पीले रंग के प्रसाद चढ़ाएं।
* सरसों की बाली भी पूजा में रखें।
* इसके बाद मां सरस्वती की आरती करें। और अंत में मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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