नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ का पहला अमृत स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर था। इसके बाद महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान मौनी अमावस्या पर 29 जनवरी को है। जानिए अमृत स्नान को क्यों माना गया है अत्यधिक पुण्यदायक। माघ माह में पड़ने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या या माघ अमावस्या भी कहा जाता है। माघ अमावस्या की तिथि 28 जनवरी की रात 7:35 से शुरू होगी और अगले दिन 29 जनवरी को शाम 6:05 पर समाप्त होगी। मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान व दान पुण्य का विशेष महत्व माना गया है, ऐसे में लाखों श्रद्धालुओं इस दिन संगम तट पर डुबकी लगाने पहुंचेगे।
इस दिन गंगा स्नान का ये है महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार शास्त्रों में माना गया है कि मौनी अमावस्या पर गंगा में डुबकी लगाने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। वहीं पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु और पितरों की पूजा अर्चना करने से जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है, साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है।
ये है अमृत स्नान का महत्व
महाकुंभ के दौरान अमृत स्नान को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गंगा नदी या दूसरी पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है, साथ ही घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। जो व्यक्ति महाकुंभ के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जानिए स्नान और पुण्य-दान का मुहूर्त
मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान सबसे श्रेष्ठ माना गया है, यदि इस मुहूर्त में स्नान नहीं हो पाता तो सूर्यास्त तक भी स्नान-दान कर सकते हैं। पंचांग के अनुसार 29 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 बजे से 6:19 बजे तक
बसंत पंचमी पर आखिरी अमृत स्नान
महाकुंभ का आखिरी अमृत स्नान बसंत पंचमी के दिन होगा। इस साल पंचमी तिथि 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट से शुरू होगी, जो 3 फरवरी को शाम 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार बसंत पंचमी 3 फरवरी को मनेगी, इस दिन मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना का महत्व भी है।





