नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। सूर्य ग्रहण के बाद अब लोग जानना चाहते हैं कि चंद्र ग्रहण कब लगेगा। शास्त्र में ग्रहण को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका असर जातकों पर विशेष रूप नजर आता है। माना जाता है कि, ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तीव्र होता है। कुछ ही दिनों में साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। चलिए उसके बारे में बताते है
3 मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण
पंचांग के मुताबिक फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को प्रातःकाल से शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। चंद्र ग्रहण की शुरुआत उपच्छाया स्पर्श के साथ दोपहर 2 बजकर 16 मिनट पर होगी। इसके बाद प्रच्छाया स्पर्श दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर होगा, जिसे सामान्य तौर पर ग्रहण का प्रारंभ माना जाता है। खग्रास यानी पूर्ण चंद्र ग्रहण शाम 4 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। परमग्रास का समय शाम 5 बजकर 4 मिनट बताया गया है। ग्रहण का समापन शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा, जबकि उपच्छाया स्पर्श का अंत 7 बजकर 52 मिनट पर होगा।
भारत में मुख्य रूप से यह ग्रहण इस समय होगा
सामान्य भाषा में समझें तो भारत में मुख्य रूप से यह ग्रहण दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:46 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान चंद्रमा लाल या नारंगी रंग में दिखाई दे सकता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
स्नान और दान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाता है। इस आधार पर सूतक काल सुबह 9 बजकर 39 मिनट से शुरू होगा और ग्रहण समाप्ति तक प्रभावी रहेगा। सूतक काल में पूजा-पाठ, शुभ कार्य, भोजन बनाना और मंदिरों के कपाट खोलना वर्जित माना जाता है। ऐसे में फाल्गुन पूर्णिमा का स्नान और दान सूतक शुरू होने से पहले करना शुभ रहेगा।
यह ग्रहण सिंह राशि पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा
खगोलीय दृष्टि से चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा, जिसके कारण कुछ राशियों पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है।
यह ग्रहण श्रद्धालुओं और खगोल प्रेमियों के लिए खास
यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि देश के अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से देखा जा सकेगा। इसके अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, उत्तरी और मध्य अमेरिका में भी यह नजर आएगा। होली से ठीक पहले लगने वाला यह ग्रहण श्रद्धालुओं और खगोल प्रेमियों दोनों के लिए खास रहने वाला है।





