नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सावन का महीना रिमझिम बारिश, हरियाली और सुहावना मौसम लेकर आता है। आप प्रकृति की शक्ति और सुंदरता को महसूस करेंगे। शास्त्रों में भी इस महीने को बहुत पवित्र बताया गया है। श्रावण माह में व्रत-उपवास का भी बहुत महत्व है और साल के इस समय में कई अन्य रीति-रिवाज भी मनाए जाते हैं। अपने हाथों पर मेंहदी कैसे लगाएं। मेंहदी का प्रयोग भारत में सदियों से होता आ रहा है। मेंहदी हर उम्र की महिलाओं को लुभाती हैं। देश के लगभग हर राज्य में मेंहदी लगाने का रिवाज है। इसका उपयोग पूजा सामग्री के रूप में भी किया जाता है और इसे सुहाग का प्रतीक माना जाता है। सावन में तीज-त्योहारों का विशेष महत्व है। इस महीने महिलाओं के लिए बहुत सारे आभूषण और साज-सज्जा के सामान होते हैं जिनमें वे कई तरह के श्रृंगार करती हैं । सावन का महीना भगवान शिव और पार्वती का महीना माना जाता है और सभी महिलाएं पार्वती को श्रृंगार का सामान चढ़ाती हैं और इसमें मेहंदी खास है।
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बालों को खूबसूरत बनाती है मेहंदी बालों के लिए भी बहुत लाभदायक होता है। मेहंदी को गलाकर बालों में लगाने से बाल सॉफ्ट, शाइनी और डैंड्रफ प्री होते हैं।
सावन बारिश का महीना है. इस महीने में कई तरह की बीमारियाँ फैलने लगती हैं और आयुर्वेद में हरे रंग को कई बीमारियों से बचाने का कारगर उपाय माना जाता है। मेहंदी की खुशबू और ठंडक तनाव को भी कम करती है। इसी कारण से मेहंदी का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। अपनी ठंडी तासीर के कारण मेंहदी का उपयोग शरीर में बढ़ी हुई गर्मी को कम करने के लिए किया जाता है।
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हाथों और पैरों के तलवों पर मेहंदी लगाने से शरीर का तापमान कम हो जाता है। मेहंदी में कई औषधीय गुण भी होते हैं। मेहंदी की ठंडक तनाव, सिरदर्द और बुखार से राहत दिलाती है। मेहंदी से कई त्वचा रोगों का इलाज किया जा सकता है। यह रूखी त्वचा को भी दूर करता है
ऐसा कहा जाता है कि सावन में महिलाओं का श्रृंगार मेंहदी के बिना अधूरा होता है। मेंहदी लगाना सावन का रिवाज है और कहा जाता है कि मेंहदी लगाने से स्त्री-पुरुष के बीच का रिश्ता मजबूत होता है। आपने सुना होगा कि मोती का रंग जितना गहरा होगा, जोड़े के बीच प्यार उतना ही अधिक होगा और रिश्ता उतना ही मजबूत होगा। मेहंदी के बिना महिलाओं का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। मेहंदी लगाने के धार्मिक महत्व के अलावा वैज्ञानिक कारण भी हैं।
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