back to top
22.1 C
New Delhi
Wednesday, March 4, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

आमलकी एकादशी पर बन रहे कई मंगलकारी योग, जानिए कब रखा जाएगा ये व्रत 

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा का भी विशेष विधान है।

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्क। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को हर वर्ष आमलकी एकादशी मनाई जाती है। धार्मिक मान्‍यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को धरती पर स्वर्ग के समान सुखों की प्राप्ति होती है। जातक मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए एकादशी का व्रत रखते हैं। इस बार 9 और 10 मार्च को आमलकी एकादशी की तिथि पर शोभन योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं।

भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा का भी विशेष विधान है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर एक मनोकामना पूरी होती है। ज्योतिषियों की मानें तो इस बार एकादशी तिथि पर शोभन योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही साधक को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। 

कब शुरू होगी एकादशी तिथ‍ि ? 

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 09 मार्च को सुबह 07 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन 10 मार्च को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर होगा। साधक मंगलवार 11 मार्च को आमलकी एकादशी का पारण करेंगे। पारण का समय सुबह 06 बजकर 35 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 13 मिनट तक है। व्रत का पारण करने के बाद अन्न और धन का दान करने का भी विधान है। 

सुख-सौभाग्य में वृद्धि करता है शोभन योग 

ज्योतिषियों की मानें तो इस एकादशी तिथि पर शोभन योग का संयोग बन रहा है, जो कि दोपहर 01 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। इस शोभन योग में लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी, साथ ही साधक पर भगवान विष्णु की कृपा बरसेगी। वहीं इस दिन शिववास योग का भी संयोग बनेगा, यह योग सुबह 07 बजकर 44 मिनट से शुरू होगा। इस समय देवों के देव महादेव कैलाश पर विराजमान रहेंगे। भगवान शिव के कैलाश पर विराजमान रहने के दौरान महादेव की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

बव एवं बालव करण के योग भी रहेंगे

वहीं फाल्गुन माह की दुर्गा अष्टमी पर पुष्य नक्षत्र का संयोग बनेगा, साथ ही बव एवं बालव करण के योग भी रहेंगे। इन योग में लक्ष्मी नारायण की पूजा एवं भक्ति करने से साधक को स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होगी और जीवन के दुख-संकटों से भी छुटकारा मिलेगा।

Advertisementspot_img

Also Read:

Amalaki ekadashi 2026: नई दुल्हनों के लिए खास आमलकी एकादशी, जानें व्रत का महत्व और लाभ

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली आमलकी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इसे रंगभरी एकादशी के...
spot_img

Latest Stories

कुछ देशों में होली पर रंग खेलने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई, जानिए कौन से हैं वो देश?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत में होली सिर्फ एक त्योहार...

Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण और होली का संयोग, जानें सूतक में किन कार्यों से रहें दूर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। फाल्गुन पूर्णिमा पर जहां एक ओर...

Vastu Tips: घर में शांति बनाए रखने के लिए ये वास्तु उपाय, बनने लगेंगे सारे काम

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। जीवन में सुख समृद्धि अथवा...

Holi Special: गुझिया तलते वक्त क्यों फटती है? जानें आसान समाधान, इस खास रेसिपी को अपनाएं

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। होली के त्योहार पर गुझिया सबसे...

CIBIL में फंसा लोन स्टेटस, अपनाएं ये स्मार्ट स्टेप्स और बचाएं अपना क्रेडिट स्कोर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अगर आपने अपना लोन पूरी तरह...