नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित है और हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग का विधिवत जलाभिषेक कर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं। हालांकि इस बार पर्व पर भद्रा और राहुकाल का संयोग बन रहा है, जिसे लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में प्रश्न हैं।
महाशिवरात्रि पर भद्रा काल का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी 2026 को भद्रा काल शाम 05 बजकर 04 मिनट से प्रारंभ होकर 16 फरवरी की सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। यानी करीब 12 घंटे 19 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। हालांकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन भद्रा का वास पाताल लोक में रहेगा। मान्यता है कि जब भद्रा पाताल लोक में होती है तो पृथ्वी पर शुभ कार्यों पर उसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे में श्रद्धालु निर्धारित शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
राहुकाल का समय
महाशिवरात्रि के दिन राहुकाल शाम 04 बजकर 47 मिनट से 06 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। राहुकाल को सामान्यतः पूजा-पाठ और नए कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इसलिए इस अवधि में विशेष धार्मिक अनुष्ठान से बचने की सलाह दी जाती है।
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग जलाभिषेक के लिए शुभ समय
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें भक्त श्रद्धा और विधिपूर्वक जल अर्पित कर सकते हैं। सुबह 08:24 बजे से 09:48 बजे तक, फिर सुबह 09:48 बजे से 11:11 बजे तक, इसके बाद दोपहर 11:15 बजे से 12:35 बजे तक (जो अत्यंत उत्तम समय माना गया है), और शाम 06:11 बजे से 07:47 बजे तक ये समय विशेष रूप से लाभकारी हैं। इन मुहूर्तों में जलाभिषेक करने से पूजा का प्रभाव बढ़ता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने की संभावना अधिक होती है।
कैसे करें शिवलिंग का जलाभिषेक?
महाशिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर पहले शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं, फिर दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग और पुष्प अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि से किया गया जलाभिषेक भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।




