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हरतालिका तीज पर महिलाएं क्‍यों करती हैं इतना कठिन उपवास, जानिए इसकी कथा और पूजा विधि

हरतालिका तीज पर महिलाएं उपवास रखकर अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक समृद्धि की कामना करती है। आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़ी कथा और पूजा विधि।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला हरतालिका तीज विशेष रूप से माता पार्वती और भगवान शिव के मिलन की याद में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। इसके अलावा कई जगह कुंवारी कन्याएं भी अपने लिए अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।

इस व्रत को अधिक कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे दिन अन्न और जल का त्याग किया जाता है। खासकर उत्तर भारत के राज्यों जैसे-राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में इस पर्व की खास धूम रहती है। इस साल हरतालिका तीज 26 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी। आइए जानें इस व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त, दान और मंत्रों से जुड़ी जरूरी बातें।

हरतालिका तीज 2025 की तिथि और मुहूर्त

व्रत तिथि: 26 अगस्त 2025, मंगलवार

तीज तिथि शुरू: 25 अगस्त 2025, दोपहर 12:34 बजे

तीज तिथि समाप्त: 26 अगस्त 2025, दोपहर 01:55 बजे

पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: 26 अगस्त को सुबह 06:00 से 08:30 तक

व्रत पारण समय: 27 अगस्त को सूर्योदय के बाद

क्‍या है हरतालिका तीज व्रत का महत्व ?

हरतालिका तीज भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, जो खासकर सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। यह उपवास न केवल पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है, बल्कि कुंवारी लड़कियां भी इसे अपने जीवन में उत्तम वर पाने की प्रार्थना के तौर पर करती हैं। इस दिन महिलाएं बिना जल और भोजन के निर्जला व्रत करती हैं और रात भर जागरण करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं। 

हरतालिका तीज की पौराणिक कथा

प्राचीन समय में राजा हिमालय की पुत्री पार्वती बचपन से ही भगवान शिव को अपना पति बनाना चाहती थीं। वे उन्हें पाने के लिए कठोर तपस्या में लगी रहीं। इसी दौरान, नारद मुनि ने राजा हिमालय को सुझाव दिया कि पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करा दिया जाए। यह प्रस्ताव राजा ने स्वीकार कर लिया। जब पार्वती को इस बात का पता चला, तो उन्होंने इसका विरोध किया। उनकी एक सखी ने उन्हें जंगल में छिपा दिया ताकि वे यह विवाह न करें। इसी वजह से इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा। जंगल में माता पार्वती ने कठोर तपस्या की, जिससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसीलिए, हरतालिका तीज के दिन महिलाएं शिव-पार्वती के अटूट प्रेम और समर्पण की भावना के साथ उपवास रखती हैं।

हरतालिका तीज पूजन सामग्री

– मिट्टी या धातु से बनी शिव-पार्वती की मूर्ति

– बेलपत्र और धतूरा, अक्षत (चावल)

– ताजे फूल-फल, दीपक और धूपबत्ती

– चंदन और जल से भरा कलश

– पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)

– नई चूड़ियां, सिंदूर और कुमकुम

– नैवेद्य के लिए मिठाई, फल और सूखे मेवे

– हरतालिका तीज व्रत कथा की पुस्तक

हरतालिका तीज पूजा विधि

सबसे पहले स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। व्रत का संकल्प लें, जैसे: “मैं आज हरतालिका तीज का व्रत करती हूँ, शिव-पार्वती की कृपा से सौभाग्य और मंगल प्राप्ति हेतु।” एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर मिट्टी या धातु की शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। दीपक जलाएं और जल से भरा कलश स्थापित करें। पूजा में बेलपत्र, धतूरा, फूल, चंदन, अक्षत आदि अर्पित करें। शिव-पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ियां, बिंदी, काजल, मेहंदी और सिंदूर अर्पित करें। हरतालिका तीज की कथा का पाठ करें या सुनें। पूजा के बाद आरती करें। रात्रि भर जागरण करें और भजन-कीर्तन में भाग लें।

व्रत पारण की विधि

पारण का सही समय ध्यान में रखें। सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण करें। सबसे पहले गौरी माता की पूजा करके उनकी मूर्ति या चित्र का विसर्जन करें। पारण के समय सबसे पहले गुड़ मिलाकर जल पीना शुभ माना जाता है। इसके बाद सात्विक और शुद्ध भोजन ग्रहण करें, जिसमें लहसुन और प्याज का उपयोग न हो। व्रत के दौरान जो भी अन्न, जल, फल आदि नहीं लिया था, उसे पारण के बाद ही ग्रहण करें।

डिस्क्लेमर : यहां प्रस्तुत जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिष शास्त्र, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। दी गई सूचनाओं की सटीकता और पूर्णता के लिए हम जिम्‍मेदार नहीं है।

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