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Thursday, April 2, 2026
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जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 कब होगी शुरू ? जानिए इस भव्य धार्मिक यात्रा का क्या है महत्व

हर साल ओडिशा के पुरी शहर में ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा जगन्नाथ रथ यात्रा बड़े धूमधाम से निकाली जाती है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 की तैयारियां एक बार फिर शुरू हो चुकी हैं। यह ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा हर साल ओडिशा के पुरी शहर में बड़े धूमधाम से निकाली जाती है। जगन्नाथ रथ यात्रा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह मंदिर भगवान की मौसी का घर माना जाता है। यह यात्रा सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जो आज भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इसके पीछे एक प्राचीन पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक यात्रा से संबंधित कुछ विशेष बातें।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 कब शुरू होगी

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि इस वर्ष 26 जून को दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर आरंभ हो रही है। यह तिथि 27 जून की सुबह 11 बजकर 19 मिनट तक प्रभावी रहेगी। ऐसे में इस वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ शुक्रवार, 27 जून 2025 को होने वाला है।

मौसी के घर होता है विशेष स्वागत

जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा यात्रा से पहले अस्वस्थ हो जाते हैं। इसी कारण वे लगभग 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इसके बाद जब वे स्वस्थ होकर आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को बाहर आते हैं, तो इस अवसर को रथ यात्रा के रूप में बड़े उत्सव के साथ मनाया जाता है। इस पावन यात्रा के दौरान तीनों भगवान पुरी स्थित गुंडिचा मंदिर, जिसे भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है, वहां सात दिनों तक ठहरते हैं। वहां उनका प्रेमपूर्वक स्वागत और सेवा की जाती है। इसके बाद वे रथों के माध्यम से वापस श्रीजगन्नाथ मंदिर लौटते हैं।

रथों की खास बात

भगवान बलराम, भगवान श्रीकृष्ण (जगन्नाथ) और देवी सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथ तैयार किए जाते हैं। इन रथों का निर्माण विशेष रूप से दारु नामक नीम की पवित्र लकड़ी से किया जाता है। यात्रा के दौरान सबसे पहले बलराम जी का रथ चलता है, उसके पीछे सुभद्रा जी का और सबसे अंत में भगवान जगन्नाथ का रथ आता है। रथ निर्माण की सबसे अनोखी बात यह है कि इनमें किसी प्रकार की कील, कांटे या धातु का प्रयोग नहीं किया जाता। केवल लकड़ी के जोड़ और पारंपरिक तकनीकों से ही रथों को तैयार किया जाता है, जिससे इनका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

Disclaimer : इस लेख में प्रस्तुत उपाय, लाभ, सलाह और जानकारियां केवल सामान्य जानकारी देने के उद्देश्य से साझा की गई हैं। लेख में शामिल सामग्री विभिन्न स्रोतों जैसे ज्योतिष, पंचांग, प्रवचन, धार्मिक ग्रंथों, मान्यताओं और लोक कथाओं से संकलित की गई है।

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