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Wednesday, March 4, 2026
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Janmashtami 2025 : कब है श्रीकृष्ण जन्मोत्सव ? जानें सही तिथि, व्रत और पूजन विधि

हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण रूप में धरती पर अवतार लिया था।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण रूप में अवतार लिया था। मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र में हुआ। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और बाल रूप की पूजा करते हैं। मंदिरों और घरों में रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव मनाया जाता है और इस समय दुग्धाभिषेक किया जाता है। भगवान को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और माखन-मिश्री, पंचामृत, तुलसीदल का भोग लगाया जाता है।

क्यों विशेष है श्रीकृष्ण जन्म का यह पर्व ?

सनातन धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष स्थान है। इस दिन भगवान विष्णु ने अपने आठवें अवतार श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था। शुभ अवसर पर लड्डू गोपाल और शालिग्राम की विशेष पूजा व अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि बाल गोपाल की श्रद्धा से पूजा करने से सुख-समृद्धि और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

जानें कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी

इस वर्ष गृहस्थों की जन्माष्टमी 15 अगस्त को और वैष्णवों की 16 अगस्त को मनाई जाएगी। पुराणों, धार्मिक ग्रंथों और मुहूर्त शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, रोहिणी नक्षत्र और वृष लग्न में मध्य रात्रि के समय हुआ था। इसलिए आमतौर पर जन्माष्टमी उस दिन मानी जाती है जब रोहिणी नक्षत्र अष्टमी तिथि के साथ विद्यमान हो।

जानिए अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का सटीक मुहूर्त

– अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 अगस्त, रात 11:49 बजे

– अष्टमी तिथि समाप्त: 16 अगस्त, रात 9:34 बजे

– रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 17 अगस्त, सुबह 4:38 बजे

– रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 18 अगस्त, सुबह 3:17 बजे

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग यदि एक दिन में न हो, तो गृहस्थ लोग तिथि मानते हैं और वैष्णव संप्रदाय नक्षत्र। यही कारण है कि इस बार जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाएगी।

15 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त –

– निशिता काल पूजा का समय : रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक (16 अगस्त की रात)

– पूजा अवधि: 43 मिनट

– पारण का समय: 16 अगस्त, रात 9:34 बजे के बाद

– अष्टमी तिथि की समाप्ति: 16 अगस्त, रात 9:34 बजे

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा निशिता काल में की जाती है। भक्तजन व्रत का पारण अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद करते हैं।

बिना रोहिणी नक्षत्र के जन्माष्टमी –

वर्तमान में समाज में प्रचलित पारण समय

– पारण समय – 16 अगस्‍त को रात 12:47 पर

हालांकि, भारत में कई स्थानों पर पारण निशिता यानी हिन्दु मध्यरात्रि के बाद किया जाता है।

मध्यरात्रि का क्षण – 16 अगस्‍त को रात 12:26 पर 

चन्द्रोदय समय – रात 10:46

16 अगस्त को जन्माष्टमी मुहूर्त-

निशिता पूजा समय : 12:04 AM से 12:47 AM (17 अगस्त की रात)

पूजा अवधि: 43 मिनट

पारण समय: 17 अगस्त सुबह 5:51 बजे के बाद

ध्यान दें, इस दिन अष्टमी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। ऐसे में पारण सूर्योदय के बाद नहीं किया जा सकेगा, यह विशेष ध्यान रखने योग्य है।

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