नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सनातन धर्म में गंगा स्नान का खास महत्व है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूर्णिमा, संक्रांति, गंगा सप्तमी, गंगा दशहरा और अमावस्या समेत शुभ तिथियों पर गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर मां गंगा, सूर्य देव, महादेव और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। सामान्य दिनों में भी साधक गंगा स्नान करते हैं। जाने कब मनाई जाऐगी गंगा सप्तमी?
गंगा सप्तमी के तिथि पर स्नान-दान का महत्व
धार्मिक शास्त्रों में निहित भागीरथ जी ने अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने मां गंगा की कठिन तपस्या की थी। जिसके बाद मां गंगा के धरती पर प्रकट होने से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष की प्राप्ति हुई और इसलिए इस दिन गंगा सप्तमी के तिथि पर स्नान-दान किया जाने लगा।
कब मनाया जाता है गंगा सप्तमी?
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर गंगा सप्तमी मनाएं जाने का विधान है, इस दिन साधक सबसे पहले गंगा स्नान करते हैं। इसके बाद देवी मां गंगा और महादेव की पूजा करते हैं। वैशाख मास में सबसे पहले गंगा स्नान साधक करते है।
गंगा सप्तमी कब है
तीन मई को सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि होगी। इसके बाद अगले दिन चार मई को सुबह चार बजे शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर खत्म होगी। हिंदु धर्म में उदया तिथि को ज्यादा मान दिया जाता है। इसलिए तीन मई को गंगा सप्तमी मनाई जाएगी।
गंगा सप्तमी शुभ योग
ज्योतिषी मान्यता अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर रवि और शिववास योग के साथ त्रिपुष्कर योग बन रहा है, इस दिन गंगा स्नान करने से साधक को सभी प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक परेशानी से मुक्ति मिलती है। व सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
पंचांग
सुबह सूर्योदय- सुबह 05 बजे से 39 मिनट तक
सूर्यास्त शाम 06 बजकर 58 मिनट तक
चंन्द्रदर्शन सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक
चंद्रास्त रात 12 बजकर 58 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 13 मिनट से चार बजकर 56 मिनट पर
विजय मुहूर्त -दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से लेकर 3 बजे तक
संध्याकाल बेला-शाम 06 बजकर 56 मिनट से सात बजे तक
निशिता बेला-रात्रि 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजे तक





