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Wednesday, March 4, 2026
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Ganga Dussehra 2025: गंगा दशहरा कब है ? जानिए तिथि और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

मान्यता है कि गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। जानिए गंगा दशहरा कब मनाया जायेगा और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त कब है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । गंगा दशहरा का पर्व प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इसे गंगावतरण के रूप में भी जाना जाता है, जिसका तात्पर्य है मां गंगा का पृथ्वी पर आगमन। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन दिन गंगा देवी धरती पर अवतरित हुई थीं। इस दिन गंगा नदी में स्नान करना और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना जाता है। मान्यता है कि गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। आइए जानें कि इस वर्ष गंगा दशहरा किस तिथि को पड़ रहा है और स्नान व दान के लिए कौन सा मुहूर्त सबसे शुभ रहेगा।

गंगा दशहरा 2025 की तिथि

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का आरंभ 4 जून 2025 को रात 11 बजकर 54 मिनट पर होगा और इसका समापन 6 जून को रात 2 बजकर 15 मिनट पर होगा। तिथियों की गणना के अनुसार, इस वर्ष गंगा दशहरा का पावन पर्व 5 जून 2025, दिन गुरुवार को मनाया जाएगा।

गंगा दशहरा के दिन स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

गंगा दशहरा के अवसर पर स्नान और दान के लिए सबसे श्रेष्ठ समय ब्रह्म मुहूर्त है, जो 5 जून को सुबह 4 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, इस दिन सिद्धि योग भी सुबह 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। ये दोनों ही मुहूर्त गंगा में स्नान और दान-पुण्य करने के लिए अत्यंत शुभ हैं।

गंगा दशहरा के दिन स्नान करते वक्‍त इन मंत्रों का करें जाप

गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा स्नान करते समय निम्न मंत्रों का उच्चारण करना शुभ माना जाता है और इन मंत्रों के जप से स्नान का पुण्य और भी बढ़ जाता है।

ॐ नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नमः

ॐ नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नमः

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलस्मिन्सन्निधिं कुरु

ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा

गंगा दशहरा मनाने के पीछे धार्मिक महत्व

गंगा दशहरा वह पावन अवसर है जब धरती पर मां गंगा का अवतरण हुआ था। धार्मिक कथाओं के अनुसार, राजा भागीरथ की कठोर तपस्या के परिणामस्वरूप ही मां गंगा का पृथ्वी पर आगमन संभव हो पाया। पृथ्वी के भीतर गंगा के तीव्र प्रवाह को सहने की क्षमता न होने के कारण, भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समाहित कर लिया, जिससे गंगा का जल धारा के रूप में पृथ्वी पर उपलब्ध हो सका। गंगा दशहरा के दिन मां गंगा के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे अनेक कल्याणकारी फल प्राप्त होते हैं।

Disclaimer : यहां प्रस्तुत की गई जानकारी धार्मिक आस्‍था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। हम इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करते है।

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