Holika Dahan 2024: क्यों जलाई जाती है होलिका और प्रहलाद की गोबर की प्रतिमा? जानिए इसके पीछे की वजह

होली के त्योहार से एक दिन पहले ही होलिका दहन करते हैं और प्रहलाद की गोबर की प्रतिमा बनाते हैं। आइये जानते हैं सम्पूर्ण जानकारी।
Holika Dahan 2024
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नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। इस साल होली 25 मार्च, 2024 दिन सोमवार को मनाई जाएगी। होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। इसके लिए होलिका और प्रहलाद की मूर्ति गोबर से बनाई जाती है क्योंकि गोबर पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।

होलिका और प्रहलाद की मूर्तियाँ गोबर से बनाने के कारण

हम अक्सर देखते है की लोग घर में पूजा पाठ के लिए गाय के गोबर का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, होलिका दहन के दौरान गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा भी बनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि गोबर पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। कुछ ऐसी मान्यताएं भी हैं कि होलिका दहन के दौरान इसके उपयोग से अकाल मृत्यु जैसे बड़े दोष कुंडली से दूर हो जाते हैं।

होलिका दहन का महत्त्व

होलिका का त्यौहार सब बड़े ही उत्सुकता से मनाते हैं। वहीं, होलिका दहन का भी अलग ही महत्व है। इसकी पूजा आमतौर पर पूर्णिमा की रात को की जाती है। पूजा के दौरान लकड़ी, गाय के गोबर और अन्य सामग्रियोंर का उपयोग करके होलिका दहन मनाया जाता है। दहन से पहले ये ध्यान दें कि अग्नि देव, भगवान विष्णु और अन्य देवताओं की पूजा करना भी जरूरी है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि अग्नि सभी नकारात्मक को ख़त्म करके वातावरण को शुद्ध करने का काम करती है। इसके साथ ही, लोग अलाव की राख को भी बेहद पवित्र मानते हैं। कुछ अलाव की राख को घर में और तिजोरी में भी रखते हैं।

होलिका दहन का समय

इस साल होली 25 मार्च 2024 को है, तो इस हिसाब से 24 मार्च को होलिका दहन है। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। ऐसे में होलिका दहन के लिए सिर्फ 1 घंटे 14 मिनट का समय मिलेगा, जिसके दौरान आप उनकी पूजा अर्चना कर सकते हैं। होलिका दहन करते समय आप इन मंत्रो का भी जाप कर सकते हैं।

मंत्र- ॐ होलिकायै नम: और मंत्र- ॐ प्रह्लादाय नम।।

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