नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। नवरात्रि का पर्व चल रहा ऐसे में लोग माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करते हैं। ताकि उनकी कृपा से सब कुछ अच्छा रहे। ज्यादातार लोग इस ही वैष्णो देवी जाने की योजना बनाते है। जिन्हें त्रिकालसुंदरी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली शक्तिपीठों में से एक है। यहां त्रिकूटा पर्वत पर एक दिव्य गुफा में तीन महाशक्तियां, महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती पिंडी रूप में विराजमान हैं।तो चलिए माता से वैष्णो देवी जुड़ी कथा जानते हैं।
इसलिए माता रानी की होती है इतनी मान्यता
वैष्णो देवी का मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है। यह मंदिर जम्मू-कश्मीर के त्रिकूट पर्वत पर स्थित है और हर साल लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए यहां आते हैं। मान्यता है कि माता वैष्णो देवी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं और संकट के समय उनकी रक्षा करती हैं।
भगवान राम से लिया ऐसा वचन
कथा के अनुसार छोटी उम्र में जब त्रिकूटा को यह ज्ञात हुआ कि भगवान विष्णु का जन्म भगवान श्रीराम के रूप में हो चुका है, तो उन्होंने राम जी को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या शुरू कर दी। जब भगवान राम, माता सीता की खोज में निकले, तब रामेश्वरम तट पर उनकी भेंट त्रिकूटा से हुई। तब देवी त्रिकूटा ने राम जी के समक्ष यह इच्छा रखी कि वह उनसे विवाह करना चाहती हैं।तब भगवान श्रीराम ने वैष्णो देवी से कहा कि उनका विवाह सीता जी से हो चुका और उन्होंने पत्नी व्रत लिया हुआ है। लेकिन साथ ही भगवान राम ने उन्हें यह वचन दिया कि मैं कलियुग के अंत में कल्कि अवतार लेकर आपसे मिलूंगा और विवाह करुंगा।
माता वैष्णो ने भी दिया वचन
भगवान राम ने माता वैष्णो देवी से एक वचन लिया। भगवान राम ने कहा कि जो भी भक्त संकट या कठिनाई में माता की शरण में आएगा, उसकी रक्षा और हर मनोकामना पूर्ण की जाएगी। यही कारण है कि आज भी माता वैष्णो देवी की मान्यता है।
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