नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन लोग हनुमान जी की पूजा अर्चना करते हैं। सनातन परंपरा में हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नव निधियों का दाता माना गया है। लेकिन कई लोग ऐसे हैं जिन्हें ये नहीं पता की हनुमान जी को ये सिद्धि कैसे प्राप्त हुई। तो चलिए इससे जुड़ी कथा बताते हैं।
सिद्धियों ने हनुमान जी को महाबली बनाया
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की और अयोध्या लौटे, तब उनके सभी भक्तों और सहयोगियों को सम्मानित किया गया। उसी समय माता सीता माता ने हनुमान जी की अपार सेवा और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें विशेष वरदान देने का निश्चय किया।सीता माता ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि वे भक्तों की रक्षा के लिए सदैव सक्षम रहेंगे और उन्हें अष्ट सिद्धि तथा नव निधि प्रदान की।
अष्ट सिद्धि और नव निधि का अर्थ और महत्त्व
अष्ट सिद्धि = अष्ट सिद्धि का अर्थ है आठ दिव्य शक्तियां अणिमा (सूक्ष्म रूप धारण करना), महिमा (विशाल रूप लेना), गरिमा (अत्यंत भारी होना), लघिमा (बहुत हल्का होना), प्राप्ति (कहीं भी पहुँच जाना), प्राकाम्य (इच्छानुसार कार्य करना), ईशित्व (सर्वशक्ति नियंत्रण) और वशित्व (दूसरों को वश में करना)।
नव निधि= नव निधि को नौ प्रकार की दिव्य संपदाएं माना जाता है, जो भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि का प्रतीक हैं। इन निधियों के माध्यम से हनुमान जी अपने भक्तों को धन, सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करने में समर्थ माने जाते हैं।
कथा से मिलती है सीख
यह वरदान केवल उनकी शक्ति के कारण नहीं मिला, बल्कि उनकी निस्वार्थ भक्ति के कारण प्राप्त हुआ। हनुमान जी ने कभी अपने बल का घमंड नहीं किया, बल्कि हर कार्य को भगवान राम की सेवा मानकर किया। आज हनुमान जयंती के अवसर पर यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा, समर्पण और विनम्रता से जीवन में हर प्रकार की सफलता और शक्ति प्राप्त की जा सकती है।




