back to top
25.1 C
New Delhi
Wednesday, March 25, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

मंगलवार व्रत: संकट मोचन हनुमान जी से पाएं जीवन की हर मुश्किल से मुक्ति जानें संपूर्ण व्रत और उद्यापन विधि

मंगलवार का व्रत हनुमान जी की कृपा प्राप्ति और जीवन की परेशानियों के नाश के लिए किया जाता है। इसे 21 मंगलवार तक नियमित रूप से रखने से साहस, सम्मान, भाग्य और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कलयुग में सात चिरंजीवियों में से एक, भगवान हनुमान की साधना सबसे अधिक की जाती है। प्रभु श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी को संकट मोचन कहा जाता है। मान्यता है कि इनका नाम मात्र लेने से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं और जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियाँ दूर हो जाती हैं। बजरंगबली को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए मंगलवार का व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है।यहाँ मंगलवार व्रत की संपूर्ण पूजा विधि, इसके लाभ और उद्यापन की विधि विस्तार से दी गई है।

मंगलवार व्रत और पूजा विधि

यदि आप यह व्रत शुरू करना चाहते हैं, तो कम से कम 21 मंगलवार तक इसे नियमित रूप से करने का संकल्प लें।

संकल्प और तैयारी: व्रत वाले दिन सुबह स्नान करके लाल रंग के वस्त्र पहनें। घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक साफ जगह पर हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

पूजन सामग्री: हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं और भगवान को फूल चढ़ाएं।

पाठ: इसके बाद मंगलवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें। फिर हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ करें।

भोग और आरती: भगवान को गुड़ और चने का भोग लगाकर उनकी आरती करें।

भोजन: दिन में सिर्फ एक बार भोजन ग्रहण करें (सामान्यतः शाम के समय)।

नियम: पूरे दिन अपने आचार-विचार शुद्ध रखें। शाम को हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर आरती करें।

मंगलवार व्रत के लाभ और महत्व

मंगलवार का व्रत अमंगल का नाश करता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।

इस व्रत से हनुमान जी की विशेष कृपा बनी रहती है, जिससे सभी कार्य निर्विघ्न पूरे होते हैं।

बल, साहस और सम्मान: यह व्रत व्यक्ति के सम्मान, बल और साहस में वृद्धि करता है।

होनहार और भाग्यशाली संतान की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत बहुत लाभकारी माना जाता है।

नकारात्मक शक्ति से बचाव: हनुमान जी इतने शक्तिशाली देवता माने जाते हैं कि इनके सामने कोई भी भूत-प्रेत या काली शक्तियाँ टिक नहीं पाती हैं, इसलिए यह व्रत नकारात्मक शक्तियों से बचाता है।

मंगल दोष निवारण: जिनकी कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर हो या अशुभ फल दे रहा हो, उन्हें यह व्रत जरूर करना चाहिए।

महादशा में लाभ: जिन लोगों पर मंगल की महादशा चल रही हो, उन्हें भी इस व्रत से विशेष लाभ मिलता है।

 मंगलवार व्रत के उद्यापन की विधि

21 मंगलवार तक विधि-विधान से व्रत रखने के बाद उद्यापन करना आवश्यक है:

पूजन: 21 मंगलवार पूरे होने के बाद, हनुमान जी का विधिपूर्वक पूजन करें।

चोला चढ़ाना: हनुमान जी को चोला (सिंदूर और तेल का लेप) चढ़ाएं।

भोजन और दान: 21 ब्राह्मणों को बुलाकर उन्हें भोजन कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें।

क्षमा याचना: अंत में, व्रत के दौरान हुई किसी भी भूल चूक के लिए हनुमान जी से माफी मांगें।

हनुमान चालीसा पाठ के 10 प्रमुख लाभ

चालीसा की सबसे प्रसिद्ध चौपाई, भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे, नकारात्मक शक्तियों, भय और डर को दूर करती है।

यह पाठ शनि, राहु, और मंगल जैसे क्रूर ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करने में सहायक माना जाता है।चालीसा का नियमित पाठ गंभीर रोगों और शारीरिक कष्टों को दूर करने में मदद करता है।जैसा कि हनुमान जी का नाम ही संकट मोचन है, चालीसा का पाठ जीवन के सभी अचानक आए संकटों और बड़ी परेशानियों से बचाता है।

यह पाठ बल, बुद्धि और साहस प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह डर का सामना कर पाता है।चालीसा में हनुमान जी को ‘ज्ञान गुन सागर’ कहा गया है। इसका पाठ एकाग्रता, बुद्धि और स्मरण शक्ति को बढ़ाता है।सच्चे मन और भक्ति से चालीसा का पाठ करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

शनि की साढ़े साती/ढैया में शांति

यदि किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़े साती या ढैया चल रही हो, तो मंगलवार या शनिवार को इसका पाठ करने से कष्टों में कमी आती है,रात को डरने वाले या अज्ञात भय से ग्रसित लोगों के लिए यह पाठ एक औषधि के समान काम करता है। किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने से पहले चालीसा का पाठ करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

 पाठ करने का सर्वोत्तम समय

सुबह: स्नान के बाद पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है।

शाम: संकट दूर करने और नकारात्मकता से बचने के लिए सूर्यास्त के बाद पाठ करना भी बहुत फलदायी होता है।

 मंगलवार का व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है। यह कथा बताती है कि सच्ची श्रद्धा और नियम से किए गए व्रत का फल हनुमान जी कैसे प्रदान करते हैं, और अपने भक्तों के सभी संकट और अमंगल को किस प्रकार दूर करते हैं।

मंगलवार व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक ब्राह्मण दंपत्ति रहते थे। ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ खुशी-खुशी जीवन व्यतीत करता था, लेकिन उनकी पत्नी की एक इच्छा थी कि उन्हें हनुमान जी की पूजा और व्रत से एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हो।

ब्राह्मण की पत्नी ने पुत्र प्राप्ति की कामना से विधि-विधान के साथ मंगलवार का व्रत रखना शुरू किया। वह नियम से व्रत रखती थी और कथा सुनती थी, लेकिन वह व्रत के अंतिम दिन हनुमान जी को भोग लगाना भूल जाती थी। कई मंगलवार बीत गए, लेकिन वह इसी तरह गलती करती रही।

एक दिन, हनुमान जी ने सोचा कि इस स्त्री की परीक्षा ली जाए। हनुमान जी ने स्वयं एक साधारण मानव बालक का रूप धारण किया और उसकी कुटिया के सामने प्रकट हुए। बालक रूपी हनुमान जी ने ब्राह्मणी से कहा, हे माता! मुझे बहुत भूख लगी है, कृपया मुझे भोजन कराओ। ब्राह्मणी ने प्रेम से बालक को भोजन कराया और उससे पूछा कि वह कौन है। बालक रूपी हनुमान जी ने उत्तर दिया, “मैं हनुमान हूँ, जो तुम्हारे व्रत से प्रसन्न होकर तुम्हारे घर आया हूँ। लेकिन तुम व्रत के अंतिम दिन मुझे भोग लगाना भूल जाती हो, जिससे मेरा व्रत पूरा नहीं होता।

यह सुनकर ब्राह्मणी बहुत शर्मिंदा हुई और उसने हनुमान जी से क्षमा मांगी। हनुमान जी ने उस ब्राह्मणी को क्षमा कर दिया और उसे पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया।

हनुमान जी के आशीर्वाद से कुछ समय बाद ब्राह्मणी को एक सुंदर पुत्र हुआ, जिसका नाम उन्होंने मंगल रखा। पुत्र के जन्म के बाद ब्राह्मणी ने नियमपूर्वक अपने व्रत का पालन किया और कभी भी भोग लगाना नहीं भूली।

ब्राह्मण का क्रोध और हनुमान जी का चमत्कार

कुछ समय बाद, ब्राह्मण विदेश से अपने घर वापस आया। उसने अपनी पत्नी के पास एक बालक को देखा तो उसे शक हुआ। उसने क्रोधित होकर अपनी पत्नी से पूछा कि यह बालक किसका है।

ब्राह्मणी ने सारा सच बताया कि यह बालक हनुमान जी के आशीर्वाद से हुआ है और उसने उन्हें भोग लगाना भूल जाने की बात भी बताई। लेकिन ब्राह्मण को विश्वास नहीं हुआ और उसने गुस्से में आकर पत्नी को घर से बाहर निकाल दिया।

ब्राह्मणी अपने बालक मंगल को लेकर जंगल में भटकने लगी। तभी हनुमान जी एक साधु के वेश में प्रकट हुए। साधु ने ब्राह्मणी को आश्वासन दिया कि उसके पति ने अज्ञानतावश जो पाप किया है, उसका दंड उसे मिलेगा।

कुछ समय बाद, ब्राह्मण के घर में भयंकर गरीबी और संकट आ गए। उसका व्यापार पूरी तरह ठप हो गया, और उसका सारा धन नष्ट हो गया। उसे अपने पाप का एहसास हुआ।

तब एक पड़ोसी ने ब्राह्मण को सलाह दी कि वह हनुमान जी से क्षमा मांगे और अपनी पत्नी को वापस बुला ले। ब्राह्मण ने हनुमान जी की शरण ली और उनसे अपने पापों के लिए क्षमा मांगी।

हनुमान जी ने ब्राह्मण को क्षमा किया और उसे निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी को वापस ले आए और दोनों मिलकर नियमित रूप से मंगलवार का व्रत करें। ब्राह्मण ने अपनी पत्नी को वापस बुलाया, और दोनों पति-पत्नी ने मिलकर सच्ची श्रद्धा से व्रत किया।हनुमान जी की कृपा से ब्राह्मण के घर में पुनः सुख-समृद्धि वापस आ गई और वे दोनों हंसी-खुशी रहने लगे।

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

7 महीने से फरार AAP विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा गिरफ्तार, रेप और धोखाधड़ी का आरोप

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पंजाब में बड़ी कार्रवाई करते हुए...

Who is Aryaman Birla: RCB के नए चेयरमैन बने आर्यमन बिड़ला, जानिए क्रिकेट से बिजनेस तक का सफर

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। आईपीएल 2026 शुरू होने से पहले...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵